- इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दी मंजूरी, वर्ष 2000 में गिरफ्तारी के बाद हुई थी उम्रकैद की सजा
संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना (शामली)। पाकिस्तानी नागरिक वारिस उर्फ राजा व जौला गांव के अशफाक पर राष्ट्रद्रोह के मामले में उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया है। दोबारा ट्रायल शुरू करने अनुमति दी है। इस मामले में सजा पाए पाक नागरिक को 19 साल जेल में बिताने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर उन्मोचित किया गया था। इसके बाद से ही वह पुलिस की निगरानी में है।
वर्ष 2000 में पुलिस ने पाकिस्तान के गुजरावाला निवासी वारिस उर्फ राजा व जौला गांव निवासी अशफाक उर्फ नन्हें को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अवैध हथियार व गोला-बारूद बरामद किया था। उस समय जौला शामली के कांधला थानाक्षेत्र के अंतर्गत आता था। वर्तमान में बुढ़ाना क्षेत्र में है। राष्ट्रद्रोह के आरोप में दोनों मुजरिमों को 2017 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वर्ष 2019 में हाईकोर्ट ने वारिस व अशफाक को बरी कर दिया था। क्योंकि प्रशासन ने राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाने से पूर्व राज्य सरकार से अनुमति नहीं ली थी।
जेल से उन्मोचित किए जाने के बाद अशफाक अपने गांव में जाकर खेती करने लगा, जबकि करीब 19 साल जेल में बिताने के बाद वारिस को पाकिस्तान ने अपना नागरिक मानने से इनकार कर दिया था। इसलिए वह पुलिस की निगरानी में बताया जाता है। सहायक अभियोजन अधिकारी तबस्सुम ने बताया कि पुलिस ने इस मामले में शासन की अनुमति प्राप्त कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रेषित किया। जिस पर न्यायिक मजिस्ट्रेट अरुण सिंह ने अभियुक्तों को समन जारी किए थे। बचाव पक्ष की ओर से एक ही मुकदमे में दो बार विचारण नहीं करने का हवाला देते हुए स्थानीय न्यायालय के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सहायक अभियोजन अधिकारी ने बताया कि उच्च न्यायालय ने न्यायिक मजिस्ट्रेट अरुण सिंह के आदेश को सही ठहराया। न्यायालय द्वारा जारी किए जा रहे समन पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अब इस मामले को सत्र न्यायालय में भेजा जाएगा। जहां राष्ट्रद्रोह में मुकदमे में दोबारा ट्रायल होगा।