कैंसर के इलाज की जिले में नहीं है व्यवस्था
शामली। जिले में कैंसर के मरीजों का उपचार की कोई व्यवस्था तक नहीं है, ऐसे में मरीजों को मेरठ, नोएडा या दिल्ली भेजा जाता है। आयुष्मान कार्ड धारकों को यदि कैंसर होता है तो उनको भी बाहर ही जाना पड़ेगा। जनपद में करीब दस हजार कैंसर के मरीज हैं। वहीं एनजीओ भी कैंसर के प्रति लोगों को जागरूकता अभियान चला रही है।
कैंसर की बीमारी काफी तेजी से बढ़ती जा रही है और इसका सबसे बड़ा कारण है धूम्रपान व शराब का सेवन करना, क्योंकि धूम्रपान करने से मुंह में कैंसर होता है और शराब लीवर को खराब कर देती है, जिससे वह शरीर के अंदर कैंसर जैसी बीमारी को बढ़ावा देती है। कैंसर के इलाज के जिले में स्वास्थ्य विभाग के पास कोई इंतजाम तक नहीं है और न ही इसके लिए अभियान चलाया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में कैंसर की जांच करने की सुविधा तक मरीजों को नहीं मिल पा रही है और न ही यहां पर कोई स्पेशलिस्ट है। यदि कोई सरकारी अस्पताल में कैंसर के लक्षणों वाला मरीज आता है तो उसका बिना जांच करे ही रेफर कर दिया जाता है। मरीज को दिल्ली, नोएडा या फिर मेरठ सहित अन्य प्राइवेट अस्पतालों में अपनी जांच करानी पड़ती है। आयुष्मान कार्ड धारकों को भी कैंसर का इलाज कराने के लिए बाहर जाना पड़ता है। जनपद में करीब दस हजार कैंसर के मरीज है, जो अन्य जनपदों व राज्यों में अपना उपचार करा रहे हैं।
समय पर जांच न होने पर बढ़ता है कैंसर
एसीएमओ डॉ. अतुल बंसल का कहना है कि समय पर कैंसर की जांच न होने के कारण यह भयानक रूप ले लेता है। इसलिए मरीज को थोड़ा सा भी मुंह में जख्म होने पर इसकी जांच करानी चाहिए, ताकि इसका समय पर पता चलते ही उपचार शुरू हो जाए। नागरिकों को बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू व शराब का सेवन करने से बचना चाहिए, जिससे वह पूरी तरह से सुरक्षित रह सकें।
एनजीओ कर रही लगातार जागरूक
एनजीओ किरण सेवा समिति के डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि वह कैंसर के प्रति लगातार लोगों को जागरूक कर रहे हैैं। यहां दस हजार से भी अधिक लोगों को कैंसर की बीमारी है। स्कूलों व कॉलेजों में अभियान चलाकर नशीली पदार्थ का सेवन न करने की सलाह दी जा रही है।