कैराना। कोल्हू से निकलने वाला काला धुआं हवा में जहर घोलने का काम कर रहा हैं। जिससे पर्यावरण प्रदूषित होने के साथ ही एक्यूआई का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।
दीपावली पर आतिशबाजी के बावजूद भी एक्यूआई का ग्राफ कम रहा, हालांकि बाद में एक्यूआई का ग्राफ बढ़कर 200 पर भी पहुंच गया था। वहीं, कोर्ट व सरकार की ओर से लगातार बिगड़ते पर्यावरण के वातावरण पर रोकथाम के आदेश दिए जा गए हैं। साथ ही किसानों से खेतों में पाती, पराली न जलाने की अपील की जा रही हैं। बावजूद इसके प्रदूषण कम होने का नाम नहीं ले रहा। अब कोल्हू सबसे अधिक प्रदूषण फैला रहे हैं। कैराना नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में दर्जनों कोल्हू मौजूदा समय में संचालित हैं, लेकिन इस ओर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कोई ध्यान नहीं है।
नगर के मोहल्ला आर्यपुरी स्थित नेशनल हाईवे 790 एडी की दोनों साइड दो कोल्हू संचालित है। सोमवार की सुबह करीब 6 बजे दोनों कोल्हुओं से काला धुआं निकलता दिखाई दिया। इसके अलावा सभी कोल्हू और क्रेशरों का यहीं हाल है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लैब इंचार्ज सर्वेश कुमार ने बताया कि किसी भी कोल्हू को चलाने के लिए उनके यहां से अनुमति नहीं है। एक-दो दिन में टीम को भेज कर निरीक्षण कराया जाएगा। जो भी प्रतिबंध कोल्हू संचालित है, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी
कोल्हू में जलाई जा रही पराली और प्लास्टिक
कोल्हू की भट्ठियों में ईंधन के रूप में खोई का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन क्षेत्र के कोल्हुओं में खोई की जगह पाती-पराली, पुराने टायर, प्लास्टिक की वेस्टेज को जलाया जा रहा है। जिससे सबसे अधिक प्रदूषण हो रहा है। राजेश, मनीष, अमजद का कहना है कि कोल्हुओं में मानक का प्रयोग नहीं होने के कारण वातावरण प्रदूषित हो रहा है।
कोल्हू के लिए ये हैं गाइडलाइन
- कोल्हू संचालन को बड़ी चिमनी लगानी होगी।
- पॉलिथीन, रबड व प्लास्टिक जलाने पर रोक है।
- ईंधन के रूप में खोई का प्रयोग किया जाए।
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेना जरूरी हैं।