स्वतंत्रता दिवस पर विशेष..
- डाक बंगला हुआ वीरान, खंडहर में तब्दील
- अंग्रेज अफसर पीडब्ल्यू मार्श का जन्म हुआ था इस डाक बंगले में
- 1919 से 1923 तक मुजफ्फरनगर के रहे थे कलक्टर
इंद्रपाल सिंह पांचाल
शामली। भैंसवाल गांव में पूर्वी यमुना नहर के किनारे स्थित कोठी आज खंडहर है। यह कोठी अंग्रेज कलक्टर पीडब्ल्यू मार्श के नाम से जानी जाती है। यह गांव अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में क्रांतिकारियों का ठिकाना रहा है। क्रांतिकारी ग्राम भैसवाल में आकर शरण लेते थे।
कलक्टर मार्श का जन्म गांव भैंसवाल में इसी कोठी में हुआ था। उनके पिता सिंचाई विभाग में थे। बाद में पीडब्ल्यू मार्श 1919 से 1923 तक मुजफ्फरनगर के कलक्टर रहे थे। इस कोठी के आसपास घना जंगल था। अंग्रेजी हुकूमत किसानों से लगान वसूलती थी, लगान न देने पर किसानों की फसल को जबरन उठाकर ले जाती थी। आजादी की लड़ाई में आसपास के लोगों में अंग्रेजों के खिलाफ गुस्सा भड़कने लगा था। कई बार अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों की आवाज दबाने की कोशिश की, लेकिन क्रांतिकारियों ने उनका मुकाबला किया और आजादी की लड़ाई की राह पर आगे बढ़ते गए। क्रांतिकारी नहर किनारे जंगल में पेड़ों के नीचे इकट्ठे होकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ाई की योजनाएं बनाते थे।
1947 में देश के आजाद होने की जैसे ही सूचना गांव भैंसवाल में पहुंची, तो लोगों में उत्साह और उमंग का माहौल बन गया। देश को आजादी मिलने के बाद से मार्श की कोठी वीरान हो गई थी, जो आज खंडहर की हालत में पहुुंच गई। फिलहाल यह कोठी पूर्वी यमुना खंड सिंचाई विभाग के अंडर में है। वर्ष 2016 के आसपास इस डाक बंगले के सुंदरीकरण के लिए पैसा स्वीकृत हुआ था और करीब 90 लाख रुपये की पहली किश्त भी आ गई थी। जिसमें चारदीवारी का निर्माण हुआ और शेष बचा धन इसके बाद शासन को वापस भेज दिया गया। जिस कारण यह कोठी धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो गई।
ग्रामीण इस डाक बंगले की मरम्मत की मांग करते रहे हैं। लेकिन उनकी इस मांग पर विभाग ने कोई ध्यान नहीं दिया। पूर्वी यमुना नहर खंड के अधिशासी अभियंता रविंद्र राणा का कहना है कि भैसवाल डाक बंगला मरम्मत योग्य नहीं है। डीएम की अध्यक्षता में पूर्व में एक समिति यह निर्णय लेकर शासन को अपनी रिपोर्ट भेज चुकी है। पूर्वी यमुना नहर खंड के पास कोई कार्ययोजना नहीं है।