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यज्ञ में संसार का पूर्ण व्यवहार समाहित

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संवाद न्यूज एजेंसी
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शामली। आर्य समाज के उपदेशक उमेश चंद कुलश्रेष्ठ ने कहा कि परमात्मा ने यज्ञ के साथ ही प्रजा को उत्पन्न किया है। महर्षि दयानंद ने वेदानुसार पांच यज्ञ के करने का विधान बताया है। उन्होंने कहा कि यज्ञ में संसार का पूर्ण व्यवहार समाहित है।
आर्य समाज मंदिर में बृहस्पतिवार को वेद प्रचार सप्ताह कार्यक्रम के चौथे दिन आयोजित यज्ञ के मुख्य यज्ञमान राजीव हटवाल व मिथलेश आर्य, विवेक धीमान व बबीता आर्य, सुनील व सुनीता आर्य, देवी सिंह जगनपुर व सावित्री देवी रहे। यज्ञ के ब्रह्मा आर्य समाज के पुरोहित डॉ. रविदत्त आचार्य रहे। नोएडा से आई भजनोपदेशिका अलका आर्य ने भजनों के माध्यम से मार्गदर्शन किया। आगरा से आए उपदेशक उमेश चंद कुलश्रेष्ठ ने कहा कि यज्ञ में संसार का पूर्ण व्यवहार समाहित है। ऋर्षियों ने परमात्मा की आज्ञा वेदानुसार पांच यज्ञ के करने का विधान बताया है। इनमें ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, पितृयज्ञ, वैश्वदेव यज्ञ, अतिथि यज्ञ शामिल हैं।
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यज्ञ का अर्थ केवल अग्नि में घी, सामग्री डालकर मंत्र पढ़ना नहीं है बल्कि यज्ञ का अर्थ शुभ कर्म करना। सकारात्मक भाव से ईश्वर और प्रकृति तत्वों से किए गए आह्वान से जीवन में मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए प्रतिदिन अपने घरों में यज्ञ कर कम से कम 16 आहुतियां प्रदान करें। कार्यक्रम के संयोजक राजपाल सिंह, सुभाष धीमान व नितिन वर्मा रहे। इस अवसर पर संरक्षक रघुवीर सिंह आर्य, प्रधान विनोद आर्य, मंत्री गिरधारी लाल गोयल आर्य, कोषाध्यक्ष देवेंद्र देव आर्य, शैलेश मुनि सत्यार्थी, ज्ञानेंद्र आर्य, रामेश्वर दयाल आर्य, दिनेश धीमान, विकास कुमार, नरेंद्र सिंह आर्य, बीरबल आर्य, वेदमुनि पुरमाफी, नरेश आर्य, सुरेंद्र सिंह, संतोष आर्य, नीलम आर्य, कौशल्या, शशिबाला, दिव्या, अमिता, मंजू आर्या, त्रिलोक चंद जांगड़ा, सुभाकर आर्य, पप्पू आर्य आदि मौजूद रहे।
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