शामली। शुक्रवार शाम को शिक्षकों ने डीआईओएस सरदार सिंह को ज्ञापन सौंपा। जिसमें कहा कि कि उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन नियमावली 1982 यथा संशोधित 1998 की धारा 21 के अनुुसार चयन बोर्ड की पूर्व स्वीकृति के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षकों को दंडित नहीं किया जा सकता। प्रदेश सरकार ने पूर्व में कार्यरत आयोगों को समाप्त कर उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2019 पुन स्थापित किया गया है। इस अधिनियम की धारा 18 के अनुसार दंड देने का अधिकार प्रबंध तंत्र को दिए जाने का प्रावधान प्रस्तावित है। इस प्रावधान के लागू होने से सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों से प्रबंध तंत्र मनमानी करेगा, जिससे शिक्षकों में असुरक्षा की भावना पैदा होगी। शिक्षकों ने वर्तमान धारा 18 को निरस्त कर पूर्व की धारा 21 को ही स्थापित करने की मांग की। इस अवसर पर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष पप्पू बोकाडिया, जिला महामंत्री अनिल कुमार, बाबूलाल, जगत सिंह, भुवनचंद्र आर्य, राजकुमार पटेल, राजेश कुमार, राकेश कुमार, रन सिंह, संतलाल, नीरज शर्मा, शंभूनाथ आदि रहे।