- केंद्र सरकार ने 2024 तक हर घर जल पहुंचाने का ले रखा है संकल्प
- जल निगम अभी तक भी नहीं कर पाया जमीन चिह्नित, कैसे होगा कार्य पूरा
- कहीं पूर्व प्रधान बाधा तो कहीं बिजली लाइन से आ रही दिक्कत, अधिकारी मौन
दीपक गुप्ता
शामली। 2024 तक सरकार का संकल्प शामली के गांवों में पूरा नहीं हो पाएगा, क्योंकि यहां अभी तक 22 गांवों में जल जीवन मिशन योजना के तहत हर घर जल पहुंचाने के लिए जमीन तक नहीं मिली है। इससे यहां के ग्रामीण अभी शुद्ध जल से कोसों दूर नजर आ रहे है। यहां कहीं पूर्व प्रधान बाधा बन रहे तो किसी स्थान पर ग्रामीण और एक स्थान पर प्रधान कब्रिस्तान की जमीन पर पानी की टंकी का निर्माण कराना चाहता है। एक गांव में विद्युत लाइन आने की वजह से प्रस्ताव तक पास नहीं हो सका है। प्रशासनिक अधिकारी भी समस्या का निस्तारण कराने की तरफ ध्यान नहीं दे रहे है।
केंद्र सरकार ने गांवों में हर घर तक जल पहुंचाने का 2024 तक का संकल्प ले रखा है और इसके लिए जल निगम को करोड़ों रुपये की ग्रांट भी जारी कर रखी है। शामली के 239 गांवों में जल देने के लिए जल निगम ने पांच सौ करोड़ रुपये का प्रस्ताव बना रखा है। इसके लिए दो फार्मों को भी कार्य की जिम्मेदारी सौंप रखी है। पानी की टंकी निर्माण के लिए प्रशासन सरकारी जमीन उपलब्ध कराता है, लेकिन शामली के 22 गांवों में अभी दूर तक भी पाइप लाइन और टंकी निर्माण नजर नहीं आता है।
कहीं जमीन देखी गई है, उनका प्रस्ताव तक पास नहीं किया गया। आधा दर्जन से अधिक जमीन पर सीमांकन तक नहीं हो सका, तो कहीं जमीन को कम बता दिया गया। ऐसे में जल निगम की लापरवाही तो नजर आ रही है वहीं प्रशासन भी जल निगम की साथ नहीं दे रहा है। जिस जमीन पर सीमांकन हुआ तो वहां पूर्व प्रधान व ग्रामीण विरोध पर उतर आए है और पानी टंकी का निर्माण नहीं होने दे रहे है। इसके कारण ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पाएगा। संवाद
इन गांवों में नहीं मिली जमीन
सैंपत, कांधला देहात, मलकपुर, मवी एहतमाल, बामनौली, बरेला कुकरहेरी, मामौर, अंबेटा, असदपुर, हिंड, जलालाबाद, जसाला, अब्दुलपुर, उसमानपुर, कादारपुर, खेडी बैरागी, सकौती, पीर खेडा, गुराना आदि गांव शामिल है।
पूर्व प्रधान व ग्रामीण कर रहे विरोध
बुंटा, गुराना में पूर्व प्रधान विरोध, हिंड में ग्रामीण पाइप लाइन बिछाने का विरोध कर रहे है और जमीन को आबादी में बताने की बात कह रहे है। वहीं दाभेरी में विद्युत लाइन सरकारी जमीन के ऊपर से निकलने के कारण सीमांकन नहीं हुआ तो मलकपुर में हडवाडे की जमीन है और प्रधान कब्रिस्तान की जमीन पर कार्य कराना चाहते है जिसके कारण जमीन का सीमांकन नहीं हुआ। वहीं सैंपत में सरकारी जमीन है, लेकिन न्यायालय में केस चल रहा जिससे कार्य शुरू नहीं हुआ।
22 गांवों में जमीन का विवाद चल रहा है और इसके निस्तारण के लिए प्रशासन को पत्र लिखा गया है। जैसे ही जमीन का विवाद हल हो जाएगा या अन्य स्थान पर जमीन मिल जाएगी तो जमीन का सीमांकन कर कार्य शुरू कर दिया जाएगा। - मोहम्मद हासिम, अधिशासी अभियंता जल निगम शामली