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Shamli News: शंकराचार्य के जीवन से प्रेरणा लेकर भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाएं

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-सरस्वती शिशु मंदिर में आद्य गुरु शंकराचार्य की जयंती मनाई
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। सरस्वती शिशु विद्या मंदिर जूनियर स्कूल में आद्य गुरु शंकराचार्य की जयंती हर्षोल्लास से मनाई गई। इस अवसर विद्यार्थियों को उनके जीवन से भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
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विद्यालय में मंगलवार को वंदना सत्र में आयोजित कार्यक्रम का वरिष्ठ आचार्य रविंद्र कुमार और मुख्य वक्ता प्रवेश शर्मा ने मां सरस्वती व आदि गुरु शंकराचार्य के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। आचार्य रविंद्र कुमार ने आद्य गुरु शंकराचार्य के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को बताया कि वह भारत के एक महान दार्शनिक और धर्म प्रवर्तक थे। इन्होंने अद्वैत वेदांत को ठोस आधार प्रदान किया। भगवत गीता उपनिषदों और वेदांत सूत्रों पर लिखी हुई इनकी टीकाएं बहुत प्रसिद्ध हैं। उन्होंने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार हिंदुओं के सबसे बड़े धर्माचार्य आद्य शंकराचार्य का जन्म 788 ईसवी में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को दक्षिण भारत के नंबूदिरि ब्राह्मण कुल में हुआ था। आद्य शंकराचार्य को मात्र आठ वर्ष की छोटी आयु में सभी वेदों का ज्ञान प्राप्त हो गया था। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता प्रवेश शर्मा ने बताया आद्य शंकराचार्य ने चार मठों की स्थापना की थी। उत्तर दिशा में उन्होंने ज्योतिर मठ, पश्चिम दिशा में शारदा मठ, दक्षिण दिशा में शृंगेरी मठ और पूर्व दिशा में गोवर्धन मठ की स्थापना की। हमें इनके जीवन से भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने अपने जीवन को भारत की संस्कृति सभ्यता के लिए समर्पित कर दिया। बचपन में इनको शंकर के नाम से पुकारा जाता था। इनका जन्म केरल प्रांत के कालड़ी नामक स्थान पर हुआ था। वे केवल 32 वर्ष तक ही जीये। इस अवसर पर आचार्य आशीष जैन, विजेंद्र कुमार, मोहित कुमार, संजीव बालियान, शिवकुमार धीमान, संदीप कुमार, रामकुमार, आदेश धीमान, लक्ष्मी गर्ग, सविता गुप्ता, बिंदिया मित्तल, दीपा बंसल, रमा शर्मा, साक्षी शर्मा, ऋचा संगल आदि मौजूद रहे।
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