संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। नए गन्ना पेराई सत्र के लिए केंद्र सरकार ने गन्ने का एफआरपी 290 से बढ़ाकर 305 रुपये प्रति क्विंटल करने का निर्णय लिया है। जिले के किसान संगठनों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से नए पेराई सत्र में गन्ना मूल्य महंगाई और लागत के आधार पर बढ़ाकर घोषित करने की मांग की है।
देश में राज्य महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु में एफआरपी लागू है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, पंजाब में एसएपी लागू है। वर्ष 2024 के लोक सभा चुनाव के मद्देनजर केंद्र सरकार ने एफआरपी 290 से बढ़ाकर 305 रुपये प्रति गन्ने का दाम किए जाने का निर्णय लिया है। जिससे देश के महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु के किसानों को एफआरपी का लाभ मिलेगा। किसान संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार की ओर से गन्ने का एफआरपी 15 रुपये की बढ़ोत्तरी की तर्ज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी नए गन्ना सत्र में गन्ना मूल्य महंगाई और लागत के आधार पर बढ़ाकर घोषित करें। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2013-14 में भाजपा की सरकार आने पर 450 रुपये प्रति क्विंटल गन्ना मूल्य दिलाने की घोषणा की थी। आठ साल से केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है।
यूपी सरकार भी गन्ने पर एसएपी बढ़ाए
सपा नेता व कृषि विशेषज्ञ प्रो. सुधीर पंवार कहते हैं कि केंद्र सरकार ने गन्ने के उचित व लाभकारी मूल्य में 15 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि करते हुए 10.25 प्रति रिकवरी पर 305 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इस वृद्धि का लाभ उत्तर प्रदेश सरकार को किसानों को मिलना चाहिए। प्रदेश में राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) व्यवस्था लागू है। जिसमें मूल्य निर्धारण का प्रमुख आधार लागत है। पिछले वर्ष किसानों ने मूल्य निर्धारण समिति के समक्ष 348 रुपये क्विंटल लागत के आंकड़े रखे थे, लेकिन प्रदेश सरकार ने मूल्य निर्धारण में किसानों की बढ़ी लागत की अनदेखी की थी। केंद्र सरकार की रिपोर्ट में गन्ना उत्पादन लागत 162 रुपये क्विंटल पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों को गन्ने की फसल पर 88 प्रतिशत का लाभ का दावा करने के लिए लागत मूल्यों के आंकड़ों को कम दिखाया जाता है।
किसानों के भले के लिए गन्ना मूल्य बढ़ाए प्रदेश सरकार
किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक का कहना है कि केंद्र सरकार ने एफआरपी 15 रुपये क्विंटल बढ़ाया है। घाटे की खेती कर रहे किसानों को उत्तर प्रदेश सरकार भी एसएपी बढ़ाकर गन्ने का मूल्य घोषित करे। जिससे किसानों का कुछ भला हो सके।
मंहगाई व लागत के आधार पर यूपी में गन्ना मूल्य बढ़े
भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत का कहना है कि महंगाई और लागत के आधार पर यूपी में गन्ना मूल्य बहुत कम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में 450 रुपये गन्ना मूल्य दिलाने की घोषणा की थी। आठ साल से केंद्र में प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है। महंगाई, बिजली, खाद, कीटनाशक के दाम को देखते हुए महंगाई और लागत के आधार नए पेराई सत्र का गन्ना मूल्य उत्तर प्रदेश सरकार घोषित करे। गन्ना मूल्य 600 रुपये से लेकर 750 रुपये प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए।
1151.65 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा, 639.44 करोड़ रुपये बकाया
जिले में पिछले सत्र में शामली, थानाभवन और ऊन चीनी मिलों ने 1151.65 करोड़ का गन्ना खरीदा है। अभी तक चीनी मिलों ने 512.20 करोड़ का गन्ना भुगतान किया है।मिलों पर 639.44 करोड़ रुपये का गन्ना भुगतान बकाया है। प्रशासन ने नए पेराई सत्र के शुभारंभ से पहले 639.44 करोड़ का भुगतान का लक्ष्य दिया हुआ है।