शामली। जनपद में सरकारी पशु अस्पतालों का बुरा हाल है। अधिकतर अस्पताल भवन जर्जर भवनों में चल रहे हैं। जहां तैनात कर्मचारी और डाक्टर जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं। किसी अस्पताल में बिजली ही नहीं है, तो कहीं पर गंदगी के अंबार है और झाड़ियां उगी हुई है। पशु अस्पतालों में कहीं पशु बांधे जा रहे है तो कहीं उपले बनाए जा रहे हैं।
गांव कुड़ाना स्थित पशु अस्पताल
यहां भवन जर्जर अवस्था में है। बाहर का पूरा सीमेंट उतरा हुआ है। वहीं अंदर कमरे के लिंटर का सीमेंट भी उतरकर गिरने लगा है। डाक्टर और कर्मचारी भी कुर्सी पर बैठने से डरते है। अस्पताल में बिजली भी नहीं है। सौर उर्जा की प्लेट्स से काम चलाया जा रहा है। एक हैंडपंप है वह भी खराब पड़ा है।
गांव मालैंडी
पशु अस्पताल में कोई डाक्टर नहीं मिला। यहां बड़ी-बड़ी झाडियां उगी हुई है। गांव के लोगों द्वारा अस्पताल में पशु बांधे जा रहे है। देखरेख न होने के कारण भवन भी जर्जर अवस्था में पड़ा है।
गांव बधेव
अस्पताल में कोई सफाई नहीं है। देखरेख न होने के कारण भवन की हालत भी खस्ता है। पीछे की दीवार गिरी हुई है। परिसर में गंदगी पड़ी हुई है। 11 बजे तक भी अस्पताल में डाॅक्टर नहीं मिला। बाहर से ताला लगा पाया गया।
बोले ग्रामीण
गांव बधेव के सर्वेश देशवाल का कहना है कि भवन की ओर भी कोई ध्यान नहीं है। वहीं गांव मालैंडी के विकास और फूल कुमार का कहना है कि अस्पताल खुलता ही नहीं है, जिस कारण झाड़ियां उगी हुई है। गांव वाले पशु बांध रहे है उपले बना रहे है। जिस ओर अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है। गरीब लोगों के पशुओं का कोई इलाज नहीं हो रहा है।
जिन अस्पतालों के भवन जर्जर है, उनका बजट बनाकर शासन को भेजा है। जल्द ही भवनों की मरम्मत कराई जाएगी। डाॅक्टरों की कमी है, जिस कारण समस्या हो रही है। -सीबी कश्यप, सीवीओ