शामली। आपराधिक घटनाएं तो आए दिन होती ही रहती है। जिनका समय-समय पर पुलिस द्वारा खुलासा भी किया जाता है। मगर शामली जिले की यदि बात की जाए तो पुलिस विभिन्न आरोपों में बंद दोषियों को भी सजा दिलवाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। पुलिस ने वर्ष 2022 और 2023 में प्रभावी पैरवी करते हुए जिलेभर के 543 अपराधियों को सजा दिलवाने में अहम भूमिका निभाई है। साथ ही 59.31 लाख का जुर्माना भी लगवाया गया है। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट में 38 तो शस्त्र अधिनियम में 117 को प्रभावी पैरवी करते हुए सजा दिलाई है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार शामली के अलावा कैराना, झिंझाना, बाबरी, थानाभवन, कांधला, महिला थाना पुलिस ने प्रभावी पैरवी करते हुए जहां दो सालों में 543 अपराधियों को सजा दिलवाईं। जिनमें पॉक्सो एक्ट के तहत 38, शस्त्र अधिनियम के तहत 117, गैंगस्टर एक्ट के तहत 34, महिला संबंधी अपराधों में 22 मामलों में 29 को, एनडीपीएस एक्ट के 19 मामलों में 20, विशेष श्रेणी के 21 मामलों में 59 और अन्य प्रकरणों के 155 मामलों में 220 अभियुक्तों को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यहीं नहीं प्रभावी पैरवी करते हुए आरोपियों पर जुर्माना भी लगवाया। संवाद
ये रहे कुछ मामले
केस-1
धर्मस्थल में सामूहिक दुष्कर्म में आजीवन कारावास की सजा
कैराना में युवती को अगवा करके एक धर्मस्थल में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले में अपर जिला सत्र न्यायाधीश (एससीएसटी) रेशमा चौधरी ने दोष सिद्ध पाए जाने पर नदीम व तासिम निवासी गांव मवी थाना कैराना को आजीवन कठोर कारावास और 30-30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। सजा 28 अक्तूबर को सुनाई गई थी।
केस-2
मात्र 28 दिन में सुना दी सजा
गढ़ीपुख्ता थानांक्षेत्र में मासूम से दुष्कर्म करने वाले दोषी को कैराना कोर्ट ने पॉक्सो के अपराध में 28 दिन में ही सजा सुना दी थी। कोर्ट में दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, साथ ही उस पर 50 हजार का जुर्माना भी लगाया गया था। इस मामले में पुलिस ने 20 दिन से पहले ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
केस-3
दोषी को मिली आजीवन कारावास की सजा
नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाने और दुष्कर्म के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पाॅक्सो) ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही 60 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया था। अप्रैल 2022 में शामली के मोहल्ला नाला पट्टी निवासी अरविद उर्फ मोटा पुत्र रविद्र उर्फ भूरा को सजा सुनाई गई थी।
ये मामले तो बानगीभर मात्र है। पांच ऐसे भी मामले रहे जिनमें पुलिस ने 30 दिन के अंदर ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
पुलिस पर आरोपियों को बचाने के भी लग रहे आरोप
केस-1
कैराना निवासी गुलफसा का आरोप है कि विपक्षियों ने 1 जुलाई को उसके तथा परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की थी। मामले की रिपोर्ट भी तीन के खिलाफ दर्ज कराई गई मगर पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। वह पुलिस से लेकर एसपी के दरबार में गुहार लगा रही है।
केस-2
शामली के पंसारियान मोहल्ले निवासी मेहंदी का आरोप है कि दो माह पहले दो लोगों पर मारपीट क आ रोप लगाते हुए शिकायत की थी। मगर पुलिस ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की।
पुलिस की प्रभावी पैरवी भी रही अहम कारण
एसपी अभिषेक का कहना है कि मातहतों को निर्देश दिए गए हैं कि हर मामले में प्रभावी पैरवी की जाए। पैरवी तब तक की जाए जब तक आरोपी को सजा नहीं हो जाए। पॉक्सो और महिला संबंधी अपराधों की मॉनेंटरिंग मैं खुद भी कर रहा हूं। इसके अलावा अपराधी सजा से नहीं बच सके, इसके लिए जांच अधिकारियों को अलग से लगाया गया है, जो कोर्ट की कार्रवाई से समय-समय पर अधिकारियों को अवगत कराते हैं। जहां पर चूक होती है, उसे तुरंत ही दूर कर और प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाता है। यदि किसी पीड़ित की सुनवाई नहीं हो रही तो मुझसे शिकायत करें, तुरंत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।