11 साल बाद भी विकसित नहीं हो सका शामली
शामली। 11 साल बाद भी जिला पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाया है। आधुनिक बस अड्डा और रोडवेज कार्यशाला निर्माण का सपना अधूरा है। जिले के कई विभागों के अपने कार्यालय और आवासीय भवन नहीं मिल पाए हैं। नवीन कलक्ट्रेट कार्यालय और डीएम आवास कॉलोनी, पुलिस लाइन, जिला जज न्यायालय व कार्यालय निर्माण अधूरा है। जिले के कई विभागों के कार्यालय किराए के भवनों में चल रहे है। जिले का 12वां स्थापना दिवस बुधवार को जिला प्रशासन मना रहा है।
28 सितंबर 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने शामली को प्रबुद्धनगर नाम देते हुए जिला घोषित किया था। वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसका नाम बदलकर फिर शामली कर दिया था। जिले का नवीन मुख्यालय पूर्वी यमुना नहर के किनारे मुंडेट कलां, गोहरनी, भैंसवाल, बधेव की 265 एकड़ भूमि में निर्धारित किया था। 11 साल बाद कलक्ट्रेट कार्यालय तहसील में और पुलिस लाइन नवीन मंडी चल रही है। जिला पंचायत कार्यालय भवन गोहरनी गांव में, एआरटीओ कार्यालय एसटी तिराहे पर, उद्यान विभाग कार्यालय, मुजफ्फरनगर विकास प्राधिकरण कार्यालय, जिला विपणन कार्यालय, ग्रामीण अभियंत्रण कार्यालय नगर पालिका मार्केट माजरा रोड पर किराए के भवन में चल रहे हैं। इनके अलावा अन्य तमाम विभाग भी किराए के भवनों में संचालित हैं।
सर्फ 11 साल में 100 बैड का संयुक्त जिला अस्पताल, सीएमओ कार्यालय, लोक निर्माण विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग, जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय, पुलिस अधीक्षक कार्यालय बनकर तैयार हुए है। विकास भवन और बेसिक शिक्षा कार्यालय का निर्माण शासन से धनराशि अवमुक्त न होने के चलते पूरा नहीं हुआ है। वर्ष 2015 में स्वीकृत नवीन कलक्ट्रेट कार्यालय का निर्माण 29 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त होने के भी राजकीय निर्माण निगम तैयार नही कर पाई है। यही हाल डीएम आवास कॉलोनी का है। शासन से 17 करोड़ रुपये से स्वीकृत न होने से निर्माण अधूरा है। जिला मुख्यालय पर जिला न्यायालय कार्यालय और आवासीय भवनो के लिए भूमि आरक्षित है। चहारदीवारी के बाद इसका काम आगे नहीं बढ़ा है। अस्थाई रुप से जिला न्यायालय 12 किमी दूर कैराना तहसील मुख्यालय पर कार्यरत है।
कई विभाग अभी भी मुजफ्फरनगर से संचालित
जिला घोषित होने के बाद ड्रैनेज खंड कार्यालय, जिला उद्योग केंद्र, जिला सेवा योजन कार्यालय, दुग्ध विकास विभाग, पर्यावरण प्रदूषण नियत्रण बोर्ड, रेशम, मत्स्य, खेल, 11 साल बाद भी पूरी तरह पूरी तरह विकसित नहीं हुआ जिला समेत कई विभाग मुजफ्फरनगर से संचालित है। मुजफ्फरनगर जिला मुख्यालय से अफसर आकर अपने विभाग की गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। शामली नगर पालिका के आवासों में सिंचाई समेत दूसरे विभागों के अधिकारी कर्मचारी रह रहे है।
जिले की यह रही अब तक विकास की गति
जिले में तीन पानीपत-खटीमा, मेरठ-करनाल और दिल्ली-सहारनपुर का निर्माण, दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर चल रहा है
अंबाला शामली और शामली गोरखपुर हाईवे प्रस्तावित है
798 करोड़ की लागत से बंतीखेड़ा में बिजलीघर का निर्माण
46 करोड़ की लागत से भैंसवाल में स्टेडियम का निर्माण
198 करोड़ की लागत से पुलिस लाइन को मिली स्वीकृति
कैराना के ऊंचा गांव व गुर्जरपुर में पीएसी कैंप व फायरिंग रेंज की स्वीकृति