शामली। इस बार धनतेरस पर बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहा है जिस कारण धनतेरस का त्योहार काफी खास हो गया है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक धनतेरस पर चंद्रमा कन्या राशि में होंगे, जहां पर पहले से सुख, समृद्धि और भौतिक सुख प्रदान करने वाले ग्रह शुक्र देव विराजमान है। इस तरह से धनतेरस पर कलात्मक नाम का योग बन रहा है। इसके अलावा 10 नवंबर को धनतेरस पर शुभकर्तरी, वरिष्ठ, सरल, सुमुख और अमृत योग बन रहा है। ऐसे में धनतेरस पर खरीदारी करना बहुत ही शुभ रहेगा।
धनतेरस का त्योहार 5 दिनों तक चलने वाले दीपावली का पहला दिन होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के ही दिन भगवान धन्वन्तरि का जन्म हुआ था। हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। पंचोत्सव में सबसे पहले धनतेरस, दूसरे दिन नरक चतुर्दशी, तीसरे दिन दीपावली, चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पांचवें दिन भैया दूज का त्योहार मनाया जाता है। धनतेरस को साल भर में पड़ने वाले सभी श्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक माना जाता है। धनतेरस पर शुभ कार्य करने और शुभ खरीदारी करना बहुत ही शुभ माना जाता है। पंडित कुशलानंद जोशी ने बताया कि इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 10 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से आरंभ हो जाएगी। इस त्रयोदशी तिथि का समापन 11 नवंबर को दोपहर 01 बजकर 57 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधार पर धनतेरस का पर्व 10 नवंबर, शुक्रवार को प्रदोषकाल में मनाया जाएगा।
धनतेरस पर यम देवता की पूजा और घर के दक्षिण दिशा में दीपक जलाया जाता है। धनतेरस पर लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त 10 नवंबर, शुक्रवार को शाम 05 बजकर 47 मिनट शुरू हो जाएगा, जो शाम 07 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।
धनतेरस प्रदोष काल और वृषभ काल का मुहूर्त
धनतेरस पर प्रदोष काल में लक्ष्मी पूजा का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग की गणना के मुताबिक 10 नवंबर को शाम 05 बजकर 30 मिनट से प्रदोष काल आरंभ हो जाता है। आपको बता दें कि सूर्यास्त होने के बाद समय प्रदोष काल कहलाया जाता है। 10 नवंबर को प्रदोष काल रात 08 बजकर 08 मिनट तक रहेगा। वहीं वृषभ काल की बात करें तो शाम 05 बजकर 47 मिनट से शाम 07 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
दीपावली पूजन रविवार 12 नवंबर शाम को होगा
शामली के पंडित कुशलानंद जोशी के मुताबिक 12 नवंबर को दीपावली और अमावस्या को लेकर मतभेद है। दीपावली के सुबह के समय अमावस्या दोपहर तीन बजे बाद आ रही है। सोमवार को अमावस्या दोपहर तीन बजे तक रहेगी। किंतु देव पितरो का पूजन रविवार को दोपहर तीन बजे के बाद शुभ होगा। शाम के समय दीपावली पर लक्ष्मी का पूजन रविवार को 5.50 बजे शुरू होकर रात्रि 10.30 बजे, रात्रि 11.15 से लेकर रात्रि दो बजे तक कर सकते हैं। सोमवार को सोमवती अमावस्या होने से सुबह के समय देव पितरों का पूजन श्रेष्ठकर है।