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स्वास्थ्य अभियान: बारिश से मलेरिया का बढ़ा खतरा, बचाव के लिए बरतें सावधानी

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स्वास्थ्य अभियान:
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- साल के पहले सात महीने में मिल चुके 37 केस, पिछले साल मिले थे 57 मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले में बारिश होने से मलेरिया बुखार का खतरा बढ़ गया है। इस साल सात महीने में 37 केस मलेरिया के मिल चुके हैं। पिछले साल के मुकाबले इस साल में मलेरिया के ज्यादा केस सामने आ रहे हैं। सवास्थ्य विभाग मलेरिया की रोकथाम के लिए लोगों को अभियान के तहत जागरूक करने के दावे कर रहा है, लेकिन मलेरिया पर नियंत्रण नहीं पाया जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि मलेरिया से बचाव के लिए लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए।
जिले में इस साल में हर महीने मलेरिया के केस सामने आए हैं। अब एक सप्ताह से रोज बारिश हो रही है। बारिश होने से जलभराव होने और मच्छर पैदा होने से मलेरिया बुखार फैलने का का खतरा बढ़ गया है। सरकारी व निजी अस्पतालों में वायरल के साथ मलेरिया बुखार के केस लगातार सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस साल में जनवरी से जुलाई तक सात महीने में 37 केस मलेरिया के मिल चुके हैं। इनमें जनवरी में दो, फरवरी में पांच, मार्च में तीन, अप्रैल में छह और मई में सात, जून में पांच, जुलाई में नौ केस मिले हैं। इससे स्पष्ट है कि इस साल में कोई ऐसा महीना नहीं रहा, जिसमें मलेरिया का केस न मिला हो।
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पिछले साल 2021 की स्थिति देखे तो पूरेे साल में कुल 57 केस मलेरिया के मिले थे। इस तरह से देखा जाए तो पिछले साल की तुलना में इस बार मलेरिया के केस ज्यादा सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग मलेरिया की रोकथाम के लिए समय-समय पर अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने और एंटी लार्वा का छिड़काव करने का दावा कर रहा है, लेकिन इसके बाद भी मलेरिया पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय कुमार का कहना है कि मलेरिया की रोकथाम व बचाव के लिए जुलाई में संचारी रोग नियंत्रण माह के तहत लोगों को जागरूक किया गया। एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। लोगों को मलेरिया से बचाव के लिए मच्छर के काटने से बचाव के इंतजाम करने चाहिए।
मलेरिया की महीनेवार स्थिति
जनवरी - 02
फरवरी - 05
मार्च - 03
अप्रैल - 06
मई - 07
जून - 05
जुलाई - 09
मलेेरिया के लक्षण:
ठंड के साथ तेज बुखार होना।
सिर दर्द होना, उल्टी होना।
अत्याधिक थकान होना।
कमजोरी महसूस होना।
बचाव :
अपने घर के आसपास साफ-सफाई रखें।
गड्ढे व तालाब में जलभराव न होने दें।
गड्ढों में जलभराव रोकने से मिट्टी का भराव करें।
नाले व नालियों में भरे पानी पर सप्ताह में दो बार कीटनाशक का छिड़काव करें ।
ठहरे हुए पानी में दो बार जला हुआ मोबिल ऑयल डालें।
रात को सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
शरीर को ज्यादा से ज्यादा ढकने वाले कपड़े पहनें।
चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराएं।
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