शामली। ठंड के मौसम में निमोनिया फेफड़ों को कमजोर कर रहा है। निमोनिया ठीक होने के बाद भी मरीजों को सांस लेने में परेशानी होती है। चिकित्सकों का कहना है कि मौसम में ज्यादा ठंड होने के कारण यह समस्या बन रही है। इससे बचने के लिए ठंड से बचाव करना जरूरी है।
ठंड के मौसम में निमोनिया के केस बढ़े हैं। अस्पतालों में निमोनिया के मरीज आ रहे हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे और बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है। इलाज के बाद निमोनिया ठीक हो जाता है, लेकिन उसके बाद भी मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है। इस तरह की शिकायत वाले मरीज भी अस्पताल आ रहे हैं। चिकित्सक ठंड से बचाव करने की मरीजों को सलाह दे रहे हैं। फिजिशियन डॉ. पंकज गर्ग का कहना है निमोनिया फेफड़ों पर असर डालता है। वायरल या सामान्य निमोनिया जल्दी ठीक हो जाता है, लेकिन निमोनिया लंबे समय तक रहता है या गंभीर स्थिति होती है। उसे ठीक होने में समय लगता है। इससे फेफड़े भी कमजोर होते हैँ, जिन्हें रिकवर होने में समय लगता है। इसके साथ ही ठंड लगने से सांस की नली में सूजन आ जाती है। इस वजह से सांस लेने में दिक्कत होती है। सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ. रामनिवास ने बताया कि निमोनिया के केस आ रहे हैं, जिनकी जांच कर दवा दी जा रही है। निमोनिया की वजह से सांस लेने में परेशानी होती है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। चिकित्सक की सलाह लेकर उपचार कराएं। ठंड से बचाव के लिए सावधानी बरतें।
बोले मरीज
मोहल्ला दयानंद नगर निवासी बुजुर्ग सावित्री ने बताया कि उसे 10 दिन पहले नजला व खांसी हुई थी। चिकित्सक ने निमोनिया होना बताया था। दवा लेने के बाद निमोनिया ठीक हो गया, लेकिन सांस लेने में अब भी दिक्कत होती है। चिकित्सक ने दवा दी है।
मोहल्ला पंसारियान निवासी सलीम ने बताया उसके छह साल के बच्चे को 12 दिन पहले ठंड लगने से निमोनिया हो गया था, लेकिन इलाज के बाद भी सामान्य तरीके से सांस नहीं ले पाता। डाक्टर को दिखाकर दवा ले ली है।
नौकुआं रोड निवासी 65 वर्षीय बुजुर्ग इरशाद ने बताया उसे एक सप्ताह पहले ठंड लग गई थी। डाक्टर को दिखाया था। उसने निमोनिया होना बताया। निमोनिया तो काफी हद तक ठीक हो गया, पर अभी सांस फूलने जैसी समस्या रहती है।
ये बरतें सावधानी
- चिकित्सक की सलाह के बिना अपने आप कोई दवा न लें।
- गर्म पानी की भाप ले और गरारे करें।
- ठंड से समय रूई से छाती की सिकाई करें।
- गुनगुना पानी पीते रहें।
- शुगर, ब्लड प्रेशर और सांस के मरीज नियमित दवा लेते रहें।
- ठंड से बचाव के तरीके अपनाएं।