- दो साल पहले सर्वे आफ इंडिया ने हरियाणा यूपी सीमा पर गांव भड़ी के पास लगाए थे करीब 20 पिलर, यमुना के पानी में नष्ट हुए
- सीमा के गांव बसेड़ा अहतमाल, मामौर अहतमाल व नंगला राई के सर्वे का काम जल्द होगा शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली, कैराना। हरियाणा-यूपी सीमा विवाद के समाधान के लिए सर्वे आफ इंडिया के सर्वे करने के बाद पिलर लगाए जाएंगे। जिसका आधा-आधा खर्च दोनों प्रदेशों की सरकार वहन करेंगी। लेकिन 2020 में आई कोरोना महामारी के बाद से सर्वे का कार्य भी ठंडे बस्ते में चला गया है। भड़ी के पास लगाए गए 20 पिलर भी यमुना के पानी के कारण नष्ट हो गए हैं।
दशकों से चले आ रहे हरियाणा-यूपी सीमा विवाद को सुलझाने के प्रयास कई बार हुए, लेकिन समस्या आज भी जस की तस है। हरियाणा यूपी की सीमा का बंटवारा यमुना नदी करती है। लेकिन यमुना नदी के पानी की धारा के बार-बार स्थान बदलने के कारण सीमा पर विवाद बना रहता है। 1974 में केंद्र सरकार ने हरियाणा-यूपी सीमा विवाद के समाधान के लिए दीक्षित आयोग का गठन किया गया था। जिसके उस समय यमुना की मध्य धारा को दोनों प्रदेशों की सीमा मान कर पिलर लगाए गए थे। समय के साथ पिलर नष्ट होते चले गए और यमुना भी अपनी धारा बदलती चली गई।
सीमा पर पिलर नहीं होने व यमुना की धारा के स्थाई नहीं होने के कारण सीमावर्ती भूमि के स्वामित्व को लेकर सीमा पर दोनों प्रदेशों के किसानों के बीच झगड़े होते रहते हैं। करीब 8 साल पहले यूपी सरकार ने सैकड़ों पिलर खरीदे थे, लेकिन और बजट नहीं मिलने के कारण ये यमुना पुल के पास पड़े बेकार हो गए हैं। कोरोना काल में 2020 में सर्वे आफ इंडिया चंडीगढ़ ने दोनों प्रदेशों के लेखपालों के साथ झिंझाना व हरियाणा के करनाल क्षेत्र में सीमा का सर्वे कराया था। 2021 के शुरू में झिंझाना क्षेत्र के गांव भड़ी के पास हरियाणा सीमा पर करीब 20 छोटे पिलर लगाए गए थे, लेकिन उसके बाद कार्य आगे नहीं बढ़ सका था। समय के साथ भड़ी में लगाए गए पिलर भी यमुना के पानी में नष्ट हो गए।
कैराना तहसील के सर्वे कानूनगो फुरकान अली ने बताया कि भड़ी सीमा पर लगाए गए पिलर दो साल में ही नष्ट हो गए। मौके पर कोई पिलर नहीं है। हरियाणा सीमा के गांव बसेड़ा अहतमाल, मामौर अहतमाल व नंगला राई में सीमा के सर्वे का कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा।