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बाघ संरक्षण दिवस पर पोस्टर प्रतियोगिता में पायल अव्वल

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संवाद न्यूज एजेंसी
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कांधला। कस्बे के राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय बाघ संरक्षण दिवस का आयोजन किया गया। बाघों के संरक्षण के महत्व तथा आवश्यकता के बारे में जानकारी दी गई। इस अवसर पर आयोजित पोस्टर प्रतियोगिता में पायल अव्वल रही।
मुख्य वक्ता डॉ, संजीव कुमार ने बताया कि बाघों को बचाना वास्तव में पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के समान है। बाघ फूड चेन के सबसे अहम कड़ी है, यदि बाघ विलुप्त हो गए तो पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ जाएगा। जिससे मानव अस्तित्व पर भी खतरा आ सकता है। बाघ संरक्षण एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। भारत में इसकी शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वर्ष 1973 में की थी। उस समय भारत में बाघों की संख्या बहुत कम हो गई थी। इस अभियान का परिणाम ही है कि आज भारत में बाघ विलुप्त होने से बच सके हैं।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही प्राचार्या डॉ, प्रमोद कुमारी ने कहा कि विकास के नाम पर बढ़ रहे नगरीकरण के कारण जंगल काटे जा रहे हैं। जिससे वन्य जीवों पर संकट आ गया है। प्रकृति के लिए हर एक जीव जंतु का समान महत्व है। मनुष्य के जीवन के लिए चींटी से लेकर शेर तक सभी का अस्तित्व जरूरी है। जंगली जानवरों का आबादी में प्रवेश करना तथा इंसानों पर हमला आदि प्रकृति से छेड़छाड़ का परिणाम है। पर्यावरण संरक्षण व प्रकृति को बचाने के लिए प्रयास करते रहने का आह्वान किया। इस अवसर पर पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें पायल प्रथम, शिवानी द्वितीय तथा आकांक्षा गौतम तृतीय स्थान पर रही।
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