शामली। जिले में डेंगू का प्रकोप चल रहा है, लेकिन जिले में एलाइजा जांच की सुविधा न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों के रक्त सैंपलों को सहारनपुर मेडिकल भेजा जाता है, जिनकी रिपोर्ट आने में कई दिन लगते हैं। तीन दिन पहले भेजे गए 55 सैंपलों की अभी रिपोर्ट नहीं आई है। डेंगू संभावित मरीजों के लिए गए 22 सैंपल और सहारनपुर भेजे गए हैं।
जिले के कई गांवों में डेंगू का प्रकोप फैल रहा है। घरों में एडीज मच्छर का लार्वा भी मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग एलाइजा जांच को ही प्रमाणिक मानता है। एलाइजा जांच के बाद ही मरीज में डेंगू की पुष्टि मानी जाती है, लेकिन जिले में एलाइजा जांच की सुविधा नहीं है, जिस कारण सैंपलों को सहारनपुर मेडिकल कॉलेज में भेजा जाता है। तीन दिन पहले बृहस्पतिवार को जिले में सरकारी व निजी अस्पतालों में डेंगू संभावित मरीजों के लिए गए 55 रक्त सैंपलों को एलाइजा जांच के लिए सहारनपुर मेडिकल भेजा गया था, जिनकी अभी रिपोर्ट नहीं आई है। इसके अलावा दो दिन में इकट्ठा किए गए 22 सैंपलों को एलाइजा जांच के लिए और भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो सकेगी। जिले में एलाइजा जांच की सुविधा न होने से मरीजों को रिपोर्ट का इंतजार करना पड़ता है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि डेंगू के लक्षण वाले संभावित मरीजों के रक्त का सैंपल लिया जाता है, जिसकी एलाइजा जांच के लिए सहारनपुर मेडिकल भेजा जाता है। बुखार के लक्षण के आधार पर उपचार शुरू कर दिया जाता है।
डेंगू से घबराएं नहीं, समय पर कराएं जांच और उपचार
सीएमओ डॉ. संजय अग्रवाल ने कहा कि डेंगू प्रभावित इलाकों में सैंपलिंग और एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। डेंगू से बचाव के लिए लोगों कोभी जागरूक होने की आवश्यकता है। डेंगू से घबराने की नहीं बल्कि सही समय पर जांच और उपचार की आवश्यकता है। अपने घरों के आसपास साफ सफाई रखें और पूरी बाजू के कपड़े पहने। डेंगू का सही समय पर सही उपचार मिल जाए तो मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाता है। इस मौसम में जिसे बुखार की शिकायत हो तत्काल नजदीक के सरकारी अस्पताल में दिखाएं।
तीन तरह का होता है डेंगू
संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. जाहिद अली ने बताया डेंगू बुखार तीन तरह का होताहै। क्लासिकल (साधारण), हेमरेजिक (डीएचएफ) और डेंगूशॉक सिंड्रोम ((डीएसएस)। साधारण डेंगू बुखार में मृत्यु नहीं होती। यदि डेंगू हेमरेजिक या शॉक सिंड्रोम का तुरंत उपचार शुरू नहीं किया जाता है, तो जानलेवा साबित हो सकता है। प्लेटलेट्स 50 हजार से नीचे जाने पर ही स्थिति गंभीर मानी जाती है।
डेंगू शॉक सिंड्रोम के लक्षण
- रोगी का अत्यधिक बेचैन होना।
- तेज बुखार के बावजूद त्वचा ठंडी महसूस होना।
- रोगी का धीरे-धीरे होश खोना।
- रोगी की नाड़ी देखने पर तेज और कमजोर महसूस होना।
- रोगी का रक्तचाप कम होना।