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धान की फसल में साउथर्न राइस ब्लैक स्ट्रीक्ड ड्वार्फ बीमारी की चपेट में

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जिले के ऊन व कैराना ब्लॉक के कई गांव में असर
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई जिलों में धान की बारह से ज्यादा प्रजातियां साउदर्न राइस ब्लैक स्ट्रीक्ड ड्वार्फ बीमारी की चपेट मेें हैं। ऊन ब्लॉक के आमवाली गांव में इस बीमारी को प्रकोप देखा गया है। जिले में धान बीस हजार हेक्टेयर में बोया गया है। अगेती प्रजाति फसल अगले 15 दिन में पककर तैयार हो जाएगी।
केंद्र सरकार के कृषि अनुसंधान केंद्र ने पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली समेत कई जिलों में सर्वे किया। इस दौरान धान की पीबी 1962, 1718, 1121, 1509, 1847, पीआर 114, 136, 130,131 समेत 12 से ज्यादा प्रजातियों में साउदर्न राइस ब्लैक स्ट्रीटक्ड ड्वार्फ बीमारी का असर देखा गया है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी अमित कुमार तोमर ने बताया कि इस बीमारी का पौधे की प्रारंभिक अवस्था में अत्यधिक प्रकोप की संभावना होती है। बीमारी का असर पौधे बौने रह जाते है। पौधे की पत्तियां गहरे हरे रंग की होती हैं। कल्ले मुरझाने लगते हैं। जड़ों का विकास रुक जाता है। धीरे-धीरे भूरे रंग में बदल जाते हैं। जिससे प्रभावित कल्ले खींचने पर आसानी से उखड़ जाते हैं। प्रकोपित पौध के शीथ पर काली धारियां बनती हैं। बालियों में दाने बहुत कम बनते हैं। उन्होंने बताया कि बीमारी का प्रकोप एकल अथवा 4-8 पौधों के समूह में होता है। इस वायरस का वाहक कीट सफेद पीठवाला फुदका होता है।
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नियंत्रण और उपाय
नर्सरी के प्रकोपित पौध को रोपित नहीं करना चाहिए। पौध को उखाड़कर दूर मिट्टी में गहरा दबा देना चाहिए। खेत के चारों ओर मेंड़ के खरपतवारों को निकाल कर सफाई करनी चाहिए। जमीन के पास सफेद पीठवाला फुदका का प्रकोप दिखाई देने वाले खेतों की साप्ताहिक गहन निगरानी करनी चाहिए। खेत में 3-20 प्रतिशत प्रकोपित पौध दिखाई देने पर उसे उखाड़कर उसके स्थान पर स्वस्थ पौध का रोपण करना चाहिए। सफेद पीठवाला फुदका के नियंत्रण के लिए बुप्रोफेजिन 25 प्रतिशत एससी 800 एमएल या एसिटामिप्रिड 20 प्रतिशत एसपी 100 ग्राम या डिनोटेफ्यूरान 20 प्रतिशत एसजी 150-200 ग्राम अथवा फ्लोनिकमिड 50 प्रतिशत डब्लूजी 150 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 500-600 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।
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कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. विकास मलिक ने बताया कि कैराना और ऊन ब्लॉक के कई गांवों में धान की फसल में साउदर्न राइस ब्लैक स्ट्रीटक्ड ड्वार्फ बीमारी होने की जानकारी मिली है। इस बीमारी का असर ज्यादातर पछेती धान की फसल में हो रहा है। यदि किसान इस बीमारी का रोकथाम नहीं कर पाए तो बीस प्रतिशत उत्पादन कम हो जाएगा।
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