झिंझाना। मेरठ-करनाल हाईवे पर भूमि अधिग्रहण को लेकर हाईवे निर्माण टीम को लोगों का विरोध झेलना पड़ रहा है। इसी वजह से काठा पुल की एप्रोच रोड अधर में लटकी हुई है। किसान का आरोप है कि निर्माण टीम ने उसकी फसल पर मिट्टी डालकर बर्बाद कर दी। अभी तक भूमि का मुआवजा भी निर्धारित नहीं किया है। किसान के विरोध के चलते रविवार को निर्माण के लिए पहुंची टीम को वापस लौटना पड़ा।
मेरठ-करनाल हाईवे के चौड़ीकरण में कहीं न कहीं रुकावट आती ही रहती है। ऐसा ही मामला झिंझाना के निकट काठा नदी के पुल के पास शामली दिशा की एप्रोच रोड का है। किसान असगर पुत्र बीबू निवासी झिंझाना का आरोप लगाते है कि निर्माण टीम ने उसकी गेहूं की फसल पर मिट्टी डालकर बर्बाद कर दिया है। किसान का यह भी आरोप है कि शासन ने उसकी अधिग्रहित भूमि का अभी तक मुआवजा भी नहीं दिया है।
रविवार को जब हाईवे निर्माण टीम एप्रोच रोड का कार्य करने पहुंची तो किसान ने विरोध करते हुए टीम को कार्य नहीं करने दिया। किसान का कहना है कि पहले शासन मुआवजा दें तभी कार्य शुरू करने दिया जाएगा। इसके बाद हाईवे निर्माण टीम के कर्मचारी वापस लौट गए। ऐसा ही मामला गांव लक्ष्मणपुरा में किसान सतबीर, कटारा, बीर सिंह व चरण सिंह आदि का है। इन किसानों को भी अभी तक जमीन का मुआवजा नहीं दिया गया है। इसी वजह से टोल रोड के कार्य में देरी हो रही है। इन सभी किसानों का भी यही कहना है कि जब तक मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक हम हाईवे निर्माण को भूमि अधिग्रहण नहीं करने देंगे। हाईवे निर्माण टीम के अधिकारी केपी सिंह ने बताया कि तहसील कैराना के अधिकारियों ने मौके पर जाकर सभी जगह की पैमाइश की थी, तभी कार्य शुरू कराया गया था। फिर एक बार तहसील प्रशासन से बात कर मामले को सुलझाया जाएगा।