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करोड़ों का मुआवजा लेकर किसानों को बरगला रहे संघर्ष समिति के पदाधिकारी: एडीएम

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दिल्ली-देहरादूर इकोनॉमिक कॉरिडोर की भूमि पर कब्जा लेने को भिक्का माजरा में निर्माण कंपनी के कर्? - फोटो : SHAMLI
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शामली। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के दायरे में आ रहे गांवों के प्रधानों के साथ शुक्रवार को डीएम जसजीत कौर, सीडीओ शंभूनाथ तिवारी और एडीएम संतोष कुमार ने बैठक की। इस दौरान एडीएम ने कहा कि किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारी करोड़ों का मुआवजा लेकर दूसरे किसानों को भड़का रहे हैं।
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एडीएम ने कहा कि बुटराड़ा में जो किसान संघर्ष समिति धरनारत है, अनावश्यक किसानों को बरगलाने का काम कर रही है। तथाकथित किसान नेता खुद अपना मुआवजा लेकर बाकी किसानों को भ्रमित कर रहे हैं। समिति के सचिव भाजू निवासी विदेश मलिक और उनके परिवार ने 2695 वर्ग मीटर का एक करोड़ से अधिक का मुआवजा लिया है। विदेश मलिक ने इस धनराशि से गांव भाजू में भूमि खरीदी है। इस बैनामा पर उन्होंने कम स्टांप अदा किया। जिसके चलते उनके खिलाफ वाद भी दायर किया गया है। इसके अलावा समिति के अध्यक्ष गोगवान निवासी वीर सिंह ने परिवार सहित लगभग 2.5 करोड़ रुपये का मुआवजा लिया है। इस धनराशि से मेरठ में मकान खरीदा गया है। इसके अलाव बिजेंद्र निवासी बाबरी व उनके परिवार ने 3.5 करोड़ का मुआवजा लिया है। एडीएम ने बताया कि सभी 22 गांवों के प्रधानों ने आश्वासन दिया है कि उनके गांव में निर्माण होगा। उनके गांव के किसी किसान को कोई समस्या है तो प्रशासन के साथ समाधान कराएंगे। यह भी आश्वासन दिया गया कि बाहरी लोगों को गांव का माहौल बिगड़ने नहीं दिया जाएगा। डीएम ने किसानों से अपील कि की सभी अपना मुआवजा लें, यदि कोई समस्या है तो अधिकारियों से संपर्क करें।
निर्माण कंपनी की टीम व किसानों में दिनभर चली आंख-मिचौली
फोटो
बाबरी। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए भूमि पर कब्जे को लेकर निर्माण कंपनी के कर्मचारियों और किसानों के बीच शुक्रवार पूरा दिन आंख-मिचौली का खेल चलता रहा। निर्माण कंपनी के कर्मचारियों ने तीन गांवों में भूमि पर कब्जा लेने का प्रयास किया, लेकिन सूचना मिलने पर पहुंचे किसानों ने उन्हें कामयाब नहीं होने दिया।
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इकोनॉमिक कॉरिडोर के निर्माण के लिए बृहस्पतिवार को निर्माण कंपनी की टीम बाबरी पहुंची थी। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे किसानों ने विरोध करते हुए उन्हें लौटा दिया था। शुक्रवार को फिर से टीम भिक्का माजरा में पहुंची तो किसानों तक सूचना पहुंच गई। किसना मौके पर पहुंचे और कर्मचारियों का विरोध करते हुए कब्जा लेने से रोका। इसके कुछ देर बाद कंपनी की दूसरी टीम बाबरी पहुंच गई। इसका सूचना मिलने पर किसानों का गुट वहां पहुंचा और कार्य रूकवाया। तभी तीसरी टीम के कुछ कर्मचारियों की सूचना गांव लाडोमजरी पहुंचने की मिली। तभी भिक्का माजरा, बाबरी से किसान लाडोमजरी की ओर दौड़ पड़े और काम रूकवाया। करीब साढ़े तीन बजे तक निर्माण कंपनी के कर्मचारियों और किसानों के बीच आंख-मिचौली का खेल चलता रहा। संघर्ष समिति ने सभी जगहों पर पहुंचकर कब्जा लेने पहुंची टीमों को वापस लौटा दिया।
धरने का एक माह हुआ पूरा
बुटराड़ा में चल रहे धरने को शुक्रवार को एक माह पूरा हो गया। इस मौके पर किसान नेता प्रमोद कुमार जागलान ने हाईवे निर्माण कंपनी के अधिकारियों को फिर चेताया कि किसानों की मांगे पूरी होने तक खेतों में घुसने की हिम्मत न करें, अंजाम बुरा होगा। बिजेंद्र सिंह बाबरी, मनोज कुमार, हाजी तुफैल, मास्टर यशपाल, विनीत कुमार मलिक, गोल्डी राणा, आदि ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि मांग पूरी होने तक भूमि पर कब्जा किसी भी हाल में नहीं होने देंगे
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