जिला बनने के 11 साल बाद भी पोषण पुनर्वास केंद्र को नहीं मिली सुविधा
शामली। जिला बनने के 11 साल बाद भी शामली को पोषण पुनर्वास केंद्र की सुविधा नहीं मिल पाई है। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद जिला अस्पताल में दस बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र बनाया जाना प्रस्तावित है। शासन से इसके लिए बजट भी स्वीकृत हो चुका है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अभी इसकी तैयारी शुरू नहीं की है। पोषण पुनर्वास केंद्र शुरू न होने से अति कुपोषित बच्चों को मुजफ्फरनगर भेजना पड़ता है।
11 साल पहले शामली को जिला बनाया गया था, लेकिन अभी तक लोगों को जिला स्तर पर मिलने वाली सुविधाएं नहीं मिली है। अभी भी कई मामलों में मूल जनपद मुजफ्फरनगर के भरोसे ही रहना पड़ रहा है। जिले में अभी तक पोषण पुनर्वास केंद्र की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से पोषण पुनर्वास केंद्र बनाने के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर करीब एक साल पहले स्वीकृति मिल गई थी। इसके लिए बजट भी स्वीकृत हो चुका है। जिला अस्पताल में दस बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र बनाया जाना। इसमें पांच साल से कम आयु के गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को चिकित्सीय व पोषण की सुविधा मिलने के साथ ही बच्चों के विकास के लिए जरूरी देखभाल और खानपान संबंधी जानकारी दी जाती है, लेकिन अभी तक जिले में यह सुविधा न होने के कारण कुपोषित बच्चों को मुजफ्फरनगर पोषण पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है।
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वार्ड तैयार होने पर शासन को जाएगी रिपोर्ट
पोषण पुनर्वास केंद्र में अलग से वार्ड तैयार किया जाएगा। वार्ड के साथ अटैच रसोई और शौचालय की सुविधा उपलब्ध रहेगी। वार्ड तैयार होने पर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके बाद शासन स्तर से पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती होने वाले बच्चों के पोषण व चिकित्सा के लिए स्टाफ में चिकित्सक, स्टाफ नर्स, डायटीशियन, कुक आदि कर्मियों की नियुक्ति की जाएगी। इस केंद्र के चालू होने पर कुपोषित बच्चों को पोषण के लिए मुजफ्फरनगर नहीं भेजना पड़ेगा।
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जिले में 5659 कुपोषित बच्चे
शामली। जिले में कुपोषित बच्चों की संख्या 5659 है। इनमें 1441 अतिकुपोषित श्रेणी में और 4218 कुपोषित श्रेणी में है। जिला कार्यक्रम अधिकारी बाबर खान ने बताया कि जिले में चिह्नित सभी कुपोषित बच्चों का समय-समय स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है।
कोट
- जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र बनाया जाना प्रस्तावित है। शासन से इसकी स्वीकृति मिल चुकी है। जल्द ही वार्ड तैयार कर संसाधनों की खरीद की जाएगी। इसके बाद शासन को रिपोर्ट भेजकर स्टाफ के लिए डिमांड भेजी जाएगी।
- डॉ. सफल कुमार, सीएमएस जिला अस्पताल।