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Shamli News: बढ़ते प्रदूषण से 40 प्रतिशत तक घट गई प्रवासी पक्षियों की संख्या

Sun, 04 Feb 2024 02:01 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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मामौर झील में पहुंचे प्रवासी पक्षी। स्त्रोत- डॉ. सोनू
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शामली। जिले में सर्दियों में प्रवासी पक्षियों से गुलजार रहने वाली मामौर झील पर इस बार 40 प्रतिशत तक कम प्रवासी पक्षी पहुंचे हैं। जिसका सबसे प्रमुख कारण झील में बढ़ता प्रदूषण और पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी कम होना है। सेंटर फॉर वॉटर पीस गाजियाबाद और जिला परियोजना अधिकारी नमामि गंगे और पर्यावरण शोधार्थियों द्वारा किए गए सर्वे में यह बातें सामने आई है। यही नहीं, प्रदूषण के कारण मछलियों की संख्या भी कम होती जा रही है। नाममात्र की मछलियां ही यहां पर दिख रही है। झील में प्रदूषण पर अंकुश लगाने और लोगों को जागरूक करने का निर्णय वन विभाग के अधिकारियों ने भी लिया है।
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सर्दियों में हिमालय की तलहटी से होते हुए मामौर झील पर बड़ी संख्या में पक्षी आते हैं। हिमालय, साइबेरिया, मंगोलिया, और आसपास के क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड के साथ बर्फ पड़ती है, जिस कारण पक्षी कूच कर जाते हैं। यह पक्षी हिमालय पर्वत से होते हुए भारत के मैदानी इलाकों में पहुंचते हैं। इस बार पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी कम हुई है। पर्यावरण शोधार्थी डॉ. सोनू कुमार ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण के कारण प्रवासी पक्षी मैदानी इलाकों से दूर हट रहे हैं, जिससे पक्षियों का प्रजनन स्वभाव प्रभावित हो रहा है। मामौर झील पर भी सर्वे में सामने आया कि इस बार चालीस प्रतिशत पक्षी कम पहुंचे। हर साल यहां पर 800 से अधिक पक्षी पहुंचते थे, इस बार 250 से 300 ही दिखाई दिए।





ये पक्षी आते हैं मामौर झील पर

सर्दियों में तिब्बत व लद्दाक से कूट व लॉर्ज कॉर्पोरेट पक्षी आते हैं। इसके अतिरिक्त साइबेरिया, मध्य एशिया के देशों से अमेरिकन टील, डबलिंग डक, श्वेत कंधा, बार हेडेड ग्रीस, पिनटेल, रूडी शेल डक, विजन, ग्रे लेग्ड गिज, सोवलर्स, पर्पल स्वेमफेन आदि पक्षी मामौर झील पर पहुंचते थे।
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ये पक्षी नहीं पहुंचे इस बार

पिनटेल डक, रुडी शेल्डक, अमेरिकन टील, ग्रेलैग हंस, सोवलार्स पक्षी आदि।



लोगों को किया जा रहा जागरूक
डॉ. सोनू और क्षेत्रीय वन अधिकारी राजेश कुमार का कहना है कि आद्रभूमियों के सरंक्षण के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। प्रदूषण न फैलाए, इसके प्रति अभियान चलाया जाएगा। मछलियों के लिए दाने पानी की भी व्यवस्था कराने का प्रयास किया जाएगा।

मामौर झील पर प्रवासी पक्षियों व तितलियों की आमद इस बार बहुत कम संख्या में दिखाए दी है। बढ़ते प्रदूषण और पहाड़ों पर बर्फबारी कम होने के कारण प्रवासी पक्षी बहुत कम संख्या में आए हैं। लोगों को भी अभियान चलाकर जागरूक किया जाएगा। इसके अलावा मामौर झील में वेस्ट नहीं डाला जाए, इसके लिए डीएम और अन्य अधिकारियों से भी मिलकर समाधान की मांग उठाई जाएगी।
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डॉ सोनू कुमार , उप निदेशक, सेंटर फॉर वॉटर पीस गाजियाबाद और जिला परियोजना अधिकारी नमामि गंगे
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