शामली। प्रदेश सरकार ने सोमवार को आम बजट पेश कर दिया। बजट में पश्चिम उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक नगरी को उपेक्षित किया गया है। बजट में शामली के लिए कोई बड़ी सौगात नहीं दी गई। किसानों से लेकर युवाओं और अन्य को हायर एजूकेशन के लिए कोई कॉलेज, विकास की परियोजनाएं मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, उद्यमियों ने बजट की सराहना की।
जिले की महिलाओं को भी उम्मीद थी कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार कोई न कोई योजना लेकर आएगी। सरकार की तरफ से यहां भी अपेक्षा ही की गई। युवाओं को शैक्षिक क्षेत्र में कोई आमूल-चूल परिवर्तन या आधारभूत ढांचा विकसित होने की उम्मीद थी। शिक्षा की दृष्टि से शामली बहुत पिछड़ा हुआ है। यहां पर रूटीन पढ़ाई के कॉलेज के अलावा उच्च शिक्षा या तकनीकी शिक्षा के संस्थानों का अभाव है। ऐसे में युवाओं को उम्मीद थी कि सरकार कोई न कोई शिक्षण संस्थान या तकनीकी संस्थान की घोषणा करेगी ताकि उनके रोजगार और उत्थान का मार्ग निकल सके। हालांकि डार्क जोन में निजी बिजली कनेक्शन देने, निराश्रित महिलाओं की पेंशन एक हजार रुपये कर सरकार ने सभी को लुभाने का कार्य किया है।
-सरकार में नहीं था शामली का प्रतिनिधि
जनपद में तीन विधानसभा हैं। शामली थानाभवन और कैराना। तीनों ही विधानसभा में पिछली बार भाजपा के तीनों प्रत्याशी हार गए थे। शामली में विधायक प्रसन्न चौधरी, कैराना में नाहिद हसन और थानावन में अशरफ अली है। शामली जिले से सरकार में शामली का कोई भी प्रतिनिधि नहीं था। यह भी एक कारण माना जा रहा है, जो जिले के हाथ कोई खास उपलिब्ध नहीं लग सकी।