संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। सरकार का नेत्र ज्योति अभियान जिले में चार माह बाद भी शुरू नहीं हो पाया है। इसके तहत मरीजों की घर-घर तलाश कर मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जाने हैं। वहीं, अस्पताल में ऑपरेशन की मशीन करीब डेढ़ साल पहले कंडम घोषित हो चुकी है। उसके स्थान पर नई मशीन नहीं आई है। इसके साथ ही सीएचसी में तैनात नेत्र सर्जन का डेढ़ माह पहले स्थानांतरण हो चुका है। उनके स्थान पर अभी तैनाती नहीं हुई है। इसके चलते मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए मरीजों को मेरठ मेडिकल रेफर किया जा रहा है।
सरकार ने इस साल अप्रैल से नेत्र ज्योति अभियान शुरू किया है। यह अभियान तीन साल चलाया जाना है। इसका उद्देश्य मोतियाबिंद के ज्यादा से ज्यादा मरीजों की घर-घर तलाश कर नि:शुल्क ऑपरेशन कराना है। हालांकि सीएचसी में ऑपरेशन की मशीन करीब डेढ़ साल पहले कंडम घोषित की जा चुकी है, तब से मोतियाबिंद के ऑपरेशन बंद हैं। वहीं, सीएचसी में तैनात नेत्र सर्जन डॉ. वीपी सिंह का बीती चार जुलाई को मुरादाबाद स्थानांतरण हो गया है। उनके स्थान पर दूसरे चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई है। इस कारण मरीजों को मोतियाबिंद के ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल रही है। ऑपरेशन के लिए चयनित मरीजों को मेरठ मेडिकल या दूसरे जिलों में रेफर किया जा रहा है। जिससे मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
रोजाना औसतन 120 लोगों की नेत्रों की जांच
नेत्र परीक्षण अधिकारी राजकुमार ने बताया कि रोजाना औसतन 120 के आसपास मरीजों की आंखों की जांच की जाती है। जिनमें 10 से 15 मरीज मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए चयनित होते हैं। सीएचसी में मशीन व नेत्र सर्जन न होने से मरीजों को ऑपरेशन के लिए मेरठ मेडिकल रेफर किया जाता है। मंगलवार को 118 मरीजों की जांच हुई। जिनमें 15 मरीज मोतियाबिंद आपरेशन के लिए चयनित हुए। बुधवार को 107 मरीजों की जांच में छह मरीज मोतियाबिंद के लिए मेरठ रेफर किए गए।
कोट
सीएचसी पर मोतियाबिंद के ऑपरेशन की मशीन कंडम है, नई मशीन नहीं आई है। सीएचसी पर तैनात नेत्र सर्जन का स्थानांतरण हो चुका है। जिला अस्पताल में दो नेत्र सर्जन हैं, लेकिन वहां भी ऑपरेशन की मशीन नहीं है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए मरीजों को मेरठ, सहारनपुर व मुजफ्फरनगर भेजा जाता है।-डॉ. संजय अग्रवाल, सीएमओ