फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shamli News: गन्ना प्रजाति 0238 को बचाने की है आवश्यकता

Sat, 04 Mar 2023 10:35 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
विज्ञापन
विज्ञापन
शामली। पद्मश्री और गन्ना प्रजाति 0238 गन्ना प्रजाति के जनक डाॅ. बक्शीराम ने कहा कि वर्तमान में किसानों को गन्ना प्रजाति 0238 को बचाने की आवश्यकता है। यह प्रजाति किसानों की आर्थिक विकास में योगदान देने वाली है।
विज्ञापन

डाॅ. बक्शीराम ने अपर दोआब चीनी मिल शामली के अनुरोध पर क्षेत्र के महरमपुर, गोहरनी, टपराना, टिटौली समेत कई गांवों में 0238 प्रजाति की गन्ने की फसल का किया। इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि गन्ना प्रजाति 0238 पिछले कई साल से यह प्रजाति लाल सड़न रोग से पूरे उत्तर प्रदेश में ग्रसित होती जारी रही है। किसान इस प्रजाति को बचाने और स्वस्थ रखने के लिए स्वस्थ बीज का चयन और गन्ने के ऊपरी हिस्सा ही बुवाई में प्रयोग करें।
उन्होंने कहा कि किसान उन्नतिशील प्रजाति को-15023 और को-0118 की बुवाई कम से कम 40 प्रतिशत क्षेत्र में अवश्य करें। को-15023 एक से ज्यादा कल्ले देने वाली गन्ना प्रजाति है। बुवाई के 45 दिन बाद यूरिया की टोप ड्रेसिंग इस प्रजाति के लिए आवश्यक है। को-0118 की बुवाई सूखे खेत में करें। नालियों में पानी अवश्य छोड़ दें। गन्ने की फसल में अधिक आर्थिक लाभ लेने के लिए गन्ने की पेड़ी प्रबंधन पर अधिक ध्यान दें।
विज्ञापन

गन्ने में चोटीबेधक रोग से बचाने के लिए मार्च के प्रथम सप्ताह से लेकर 30 जून तक गन्ने के खेत में चोटी बेधक कीट के अंडे समूह युक्त पत्तियों को तोड़कर नष्ट कर दें। 15 मार्च से लेकर 30 मई तक गन्ने के खेतों में चोटी बेधक कीटों से प्रभावित कल्लों को जमीन के अंदर नष्ट कर दें। अप्रैल के आखिर से दस मई तक कीट दिखाई देने पर कोराजन 150 मिली मीटर या 750 किग्रा छह किग्रा प्रति एकड़ में प्रयोग करें। जून के अंतिम सप्ताह में रसायनों का प्रयोग करें।
इस मौके पर शामली चीनी मिल के यूनिट वेड प्रदीप सल्लार, जीएम केन सुशील खोखर, डीजीएम कर्णपाल सरोहा, एजीएम केन दीपक राणा आदि ने डाॅ. बक्शी राम को शाॅल ओढाकर व बुके देकर स्वागत किया।
- हरियाणा के निवासी हैं डाॅ. बक्शीराम

0238 गन्ना प्रजाति के जनक डाॅ. बक्शीराम हरियाणा के हिसार के निवासी हैं। वर्ष 1999 में करनाल में गन्ना विकास विभाग के गन्ना वैज्ञानिक रहे हैं। उन्होंने दो दर्जन गन्ना प्रजाति विकसित की हैं। सेवानिवृत्त होने के बाद 25 जनवरी 2023 को भारत सरकार की ओर पद्मश्री पुरस्कार उन्हें प्रदान किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें