- स्कूलों की बारिश में टपकती है छत, पानी टपकते ही छात्रों की कांप जाती है रूह
- दशकों पुराने हो चुके है परिषदीय स्कूल, छतों से उखड़ रहा सीमेंट, आ रही दरारें
- शिक्षा विभाग का नहीं इस तरफ ध्यान, जर्जर स्कूल में पढ़ने को मजबूर है विद्यार्थी
अमर उजाला पड़ताल
दीपक गुप्ता
शामली। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले नौनिहालों की जान खतरे में है, क्योंकि हर समय उनके सिर पर मौत का साया मंडराता है। बारिश के समय स्कूलों में छतों से पानी टपकता है और जब पानी टपकता है तो छात्रों की रूह कांप जाती है। इससे वह स्कूलों से बाहर निकल आते हैं। क्योंकि यह स्कूल दशकों पुराने हो चुके हैं और शिक्षा विभाग का इस तरफ ध्यान तक नहीं है। जनपद में ऐसे 50 से अधिक स्कूल हैं, जो जर्जर हो चुके हैं, जिसमें विद्यार्थी पढ़ने के लिए मजबूर है।
जनपद में 596 में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालय हैं और यह कई दशक पुराने है। इनकी बिल्डिंग भी जर्जर हो चुकी हैं, लेकिन बिल्डिंग जर्जर होने के बाद भी शिक्षा विभाग इनसे अनजान बना हुआ है। यहां हर वर्ष जर्जर स्कूलों को चिह्नित किया जाता है। स्कूल चिह्नित तो हो जाते हैं, लेकिन इनके बजट को कई-कई वर्ष बीत जाते हैं। पिछले वर्ष भी 53 प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालय ध्वस्त करने के लिए चिह्नित किए गए थे और इनके स्थान पर 37 के करीब स्कूलों का निर्माण होना था। निर्माण कार्य के लिए चार करोड़ से अधिक बजट आया था, लेकिन बजट आने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जनपद में ऐसे 50 से अधिक स्कूल होंगे जो पूरी तरह से जर्जर हालत में है। अमर उजाला ने स्कूलों की पड़ताल की तो इस तरह का नजारा देखने को मिला
स्थान: बलवा गांव का उच्च प्राथमिक विद्यालय
यह स्कूल 67 साल पुराना हो चुका है। बरसात के मौसम में स्कूल की छत टपकती है। जब स्कूल टपकती है तो छात्र बाहर आकर खड़े होते हैं। कई कमरों की छतों का सीमेंट उतर चुका है और दरारें तक आ रही है। एक कक्ष की हालत अधिक खराब होने पर छात्रों को दूसरे कक्ष में शिफ्ट किया गया, लेकिन उसमें दरारें आने के साथ पानी टपकने की समस्या दूर नहीं हुई है। इससे उनकी जान को खतरा बना हुआ है।
स्थान : उच्च प्राथमिक विद्यालय बनखंडी शामली
स्कूल भी काफी पुराना है और स्कूल का फर्श उखड़ा पड़ा हुआ है। उखड़े फर्श में ही बैंच लगाकर छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल की दीवारों में दरारें आ रही हैं और छत भी जर्जर हालत में हैं। ऐसी हालत में ही बच्चे शिक्षा ग्रहण करने के लिए मजबूर है। पता नहीं कब इन स्कूलों का कायाकल्प हो सकेगा।
बच्चे भेजने में लगता है डर
अभिभावक राजकुमार ने कहा कि बच्चों को अब स्कूल में भेजने से डर लगता है, क्योंकि स्कूल जर्जर हालत में है। स्कूल में बारिश होते ही छत से पानी टपकता है। शिक्षा विभाग इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है।
लिख चुके हैं पत्र
अभिभावक राजकुमार ने बताया कि कई जनप्रतिनिधियों व शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर इसकी मरम्मत की मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक ध्यान नहीं दिया गया है। बारिश में स्कूल गिरने का अधिक खतरा बना रहता है।
पढ़ाई पर कम, छत पर रहता है ध्यान
छात्र शाहरूख ने बताया कि जब बारिश में स्कूल की छत टपकती है तो उन्हें हर समय छत गिरने का खतरा बना रहता है। इसलिए उनका ध्यान पढ़ाई में न होकर छत की तरफ ही रहता है। इससे उनकी पढ़ाई भी बाधित हो रही है।
निरीक्षण करने आए अधिकारियों से की शिकायत
छात्र सत्यम का कहना है कि बिल्डिंग जर्जर हो चुकी है और उनकी जान को भी खतरा रहता है। पता नहीं कब स्कूल की छत न गिर जाए। जब भी यहां अधिकारी आते है उनको छत की मरम्मत कराने की मांग करते है, ताकि वह ठीक से पढ़ाई कर सकें।
कमीशन नहीं दिया तो रोक दी रिपोर्ट
प्रधानाध्यापक देवेंद्र ने कहा कि चार साल पहले भी बीएसए को पत्र लिखा था, लेकिन इंजीनियर कमीशन मांगता है। जिसको देने से मना कर दिया था। इसलिए इंजीनियर अपनी सही रिपोर्ट नहीं लगा रहा है। इसके कारण स्कूल का चयन जर्जर स्कूल की रिपोर्ट में नहीं हो पा रहा है।
हेडमास्टरों से मांगी जाएगी रिपोर्ट
बीएसए कोमल ने कहा कि जो भी स्कूल जर्जर हैं उनकी रिपोर्ट हेडमास्टरों से मांगी जाएगी। वह खुद भी जाकर देखेंगी कि कौन-कौन सा स्कूल जर्जर है। यदि कहीं स्कूलों में छत टपक रही है तो वहां के छात्रों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कराया जाएगा, ताकि छात्रों को किसी भी तरह की दिक्कत न हो। इसके लिए कमेटी का गठन किया जा रहा है और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही बजट की डिमांड की जाएगी।