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Shamli News: बेटों की लंबी आयु के लिए माताओं ने रखा अहोई अष्टमी व्रत

Mon, 06 Nov 2023 12:48 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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जलालाबाद में अहोई अष्टमी की कथा सुनती महिलाएं: फोटो संवाद
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शामली। महिलाओं ने संतान की सुख-समृद्धि की कामना साथ अहोई अष्टमी पर्व मनाया। महिलाओं ने व्रत करके विधि-विधान से पूजा अर्चना करने के साथ ही माता अहोई अष्टमी की कथा सुनी और रात को चांद-तारों को अर्घ्य देकर व्रत खोला। इतना ही नहीं बेटियाें के लिए भी माताओं ने व्रत रखा तो वहीं झिंझाना के वृद्धाश्रम में बेटों के ठुकराने के बाद रह रही महिलाओं की ममता जागी और उन्होंने बेटों की लंबी आयु के लिए व्रत रखा।
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रविवार सुबह महिलाओं ने स्नान करके अहोई माता के व्रत का संकल्प लिया। एक ओर जहां माताओं ने संतान की खुशहाली के लिए व्रत रखा वहीं निसंतान महिलाओं ने भी व्रत रखकर संतान प्राप्ति के लिए कामना की। दिनभर व्रत पूरा करने के बाद शाम को दीवार पर अहोई माता की अष्टकोणीय आकृति, स्याहू माता और बच्चों की आकृति बनाकर विधिवत रूप से पूजा-अर्चना की। पूजा के बाद अहोई अष्टमी व्रत की कथा सुनी। इसके बाद महिलाओं ने पूजा समाप्त कर तारों को देखकर जल अर्पित कर व्रत खोला। महिलाओं ने अपने बच्चों का मिठाई खिलाकर मुंह मीठा करवाया। शास्त्रों के अनुसार अहोई अष्टमी का व्रत करवा चौथ के चार दिन बाद और दीपावली के आठ दिन पहले तथा कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को रखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से संतान फल की प्राप्ति होती है। वहीं, इस व्रत को पूरा करने वाली महिला की संतान को दीर्घायु प्राप्त होती है।
वृद्धाश्रम में महिलाओं ने रखा व्रत
झिंझाना। झिंझाना के वृद्धाश्रम में करीब 27 बुजुर्ग महिलाएं रहती है और ये वह महिलाएं हैं जिन्हें बेटों ने घर से निकाल दिया। बेटों के ठुकराने के बाद भी मां की ममता नहीं टूटी और वह अपने बेटों की लंबी आयु के लिए प्रार्थना की। वृद्धाश्रम संचालिका लक्ष्मी गुप्ता ने बताया कि यह महिलाएं हर साल बेटाें की लंबी आयु के लिए व्रत रखती है, लेकिन बेटे इनका हालचाल पूछने तक नहीं आते हैं।
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संतान की दीर्घायु के लिए रखा निर्जला व्रत
जलालाबाद। कस्बे में माताओं ने अपने बच्चों की सलामती, समृद्धि और खुशहाली की कामना के लिए पूरे दिन अहोई अष्टमी का निर्जला व्रत रखा।पौराणिक परंपरा के अनुसार शाम के समय (अलग अलग व्यंजन) के साथ महिलाओं ने अपनी सास व बुजुर्ग महिलाओं को भोजन, वस्त्र आदि उपहार भेंट देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। महिलाओं ने तारों को देखकर व्रत खोला और चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दिया।
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