शामली। जैन मुनि 108 श्रद्धानंद महाराज ने कहा कि संसारी व्यक्ति को हर चीज का सदुपयोग करना चाहिए। सदुपयोग से ही तन, मन और धन की सार्थकता है।
बुधवार को दिगंबर जैन धर्मशाला में चातुर्मास कर रहे जैन मुनि ने मंगल प्रवचन करते हुए कहा संसारी प्राणी अनेक प्रकार से दान, पूजा व परोपकार आदि सतकर्म करके पुण्य संचित करता है। इसके फलस्वरूप उसे स्वस्थ तन, विचारशील मन व सुख देने के लिए धन प्राप्त होता है। लेकिन संसारी व्यक्ति इनका सदुपयोग नहीं कर सकता ओर दुखी होता है।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ तन से भक्ति, परोपकार व साधुओं की सेवा कर सकते हैं। विचारशील मन से दूसरों का हित चिंतन, स्व के कल्याण के मार्ग पर चिन्तन कर सकते हैं। प्राप्त धन से साधुओं को दान, दूसरों का कष्ट हरने से उपयोग कर सकते हैं। खुद के जीवन को सुंदर बनाने में भी इसका उपयोग कर सकते हैं। जैन मुनि ने कहा सदुपयोग से ही तन, मन और धन की सार्थकता है।