शामली। जनपद के कई पंचायत घरों की हालत बद से बदतर हो चली है और उनकी सुध लेने वाला भी कोई नहीं है। कई पंचायत घर ऐसे हैं जहां ताला खुलता तक नहीं है और कई पंचायत घर का कार्य प्रधान के घर से होता है, क्योंकि सरकारी कंप्यूटर ही प्रधान के घर पर रखा हुआ है। गोहरनी गांव में तो प्रधान के कार्यालय से ही सभी कार्य होते हैं। मुंडेट कलां गांव में तो पंचायत सचिव महीने में एक बार ही आता है और किराए के भवन में प्रधान पति व पंचायत सहायक बैठकर सभी कार्य करते हैं। मीमला गांव, करमूखेड़ी, मतनावली, चौसाना, पंजीठ गांव में सचिवालयों पर ताला लटका हुआ था तो मामौर में पंचायत सचिव की कुर्सी ही खाली पड़ी थी। पंचायत घरों को लेकर टीम ने पड़ताल की तो धरातल में पंचायतों के कार्याें की पोल खुली।
स्थान- मुंडेट कला- समय: 11:45 बजे।
मुंडेट कला गांव में पंचायत घर नहीं है और वहां एक किराए के भवन में पंचायत घर संचालित है। प्रधान पति ने बताया कि सचिव यहां कभी-कभी आते हैं और वह पंचायत सहायक के साथ गांव के विकास कार्य कराने के लिए कार्य करते हैं।
स्थान- गोहरनी- समय: 12:45 बजे।
गोहरनी गांव में ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत घर की जमीन पर विवाद चल रहा है, जिससे कार्य पूरा नहीं हो सका है। पंचायत सचिव को कभी देखा नहीं है और यदि कोई कार्य होता है तो प्रधान के कार्यालय से कार्य किया जाता है। प्रधान प्रॉपर्टी डीलर है और उनके कार्यालय पर ही कार्य होता है।
स्थान- मीमला- समय: 11 बजे।
मीमला गांव में पंचायत घर पर ताला लटका मिला और ग्रामीणों का कहना है कि सचिव यहां आते नहीं है। कार्यालय का ताला भी सप्ताह में एक या दो दिन ही खुलता है।
स्थान- लिसाढ़, करमूखेडी- समय: 11:30 बजे
लिसाढ़ और करमूखेड़ी गांव में पंचायत घर से सचिव नदारद मिले और पंचायत सहायक मिले। पंचायत सहायकों व ग्रामीणों का कहना है कि जब कार्य होता है तभी सचिव आते हैं।
स्थान- मतनावली- समय: 11:45 बजे।
ग्रामीणों ने बताया कि मतनावली गांव में पंचायत घर का कंप्यूटर प्रधान के घर रखा हुआ है। वहां प्रधान के घर से ही सभी कार्य होते हैं। ऐसे में सचिव व पंचायत सहायक उनके घर पर बैठकर ही कार्य करते हैं।
स्थान- चौसाना- समय: 11:45 बजे।
चौसाना गांव में पंचायत सचिवालय पर ना तो सहायक समय पर मिलती है और ना ही प्रत्येक दिन सचिवालय को खोला जाता है। ग्रामीणों को परिवार रजिस्टर की नकल अथवा अन्य जरूरी कार्यों के लिए धक्के खाने पड़ते है।
स्थान- मामौर- समय: 11:30 बजे।
मामौर में पंचायत भवन में ग्राम सचिवालय का कार्यालय तो खुला था, लेकिन सचिव मनोज कुमार की कुर्सी खाली पड़ी थी। ग्रामीणों ने बताया कि ग्राम सचिवालय में ग्राम सचिव कभी कभार ही आते है। वृद्धा सीना, मुस्तकीम, ताहिर ने बताया कि कभी-कभी सचिव यहां आकर बैठते है। इसके कारण उनको कार्य करने के लिए तहसील व ब्लॉक जाना पड़ता है।
स्थान- पंजीठ- समय: 11:55 बजे।
पंजीठ में सचिवालय पर ताला लटका था। ग्रामीणों का कहना था कि सचिव सप्ताह में एक दो बार ही कुछ समय के लिए आते है। सचिव शिव कुमार ने फोन पर बताया कि वह बुच्चाखेड़ी में है।
स्थान- चढ़ाव- समय: 12:15 बजे।
गांव चढ़ाव में स्थित ग्राम सचिवालय पर सचिव रोहित अनुपस्थित मिले। वहां पर बने शौचालय के साथ ही ग्राम प्रधान सचिव दोनों के कार्यालय पर ताला लगा हुआ था। ओमपाल, टीटू ने बताया कि कभी-कभी गांव प्रधान व सचिव बैठ जाते हैं।
स्थान- इस्लामपुर घसौली- समय: 12:20 बजे।
गांव इस्लामपुर घसौली के सचिवालय में सचिव गायब मिले और वहां पंचायत सहायक मौजूद थे। मुन्ना खान ने बताया कि कभी-कभी सचिव आते है। गुलजार ने बताया कि गांव के लोगों की समस्या सुनने के लिए सचिवालय में कोई नहीं बैठता है।
यदि पंचायत घराें पर ताला लगा रहता है या किसी प्रधान के कार्यालय में कार्य किया जाता है तो इसकी जांच कराई जाएगी। पंचायत घर के कंप्यूटर को प्रधान को अपने घर रखने का अधिकार नहीं है। वह मामले की जांच कराने के लिए टीम का गठन कर कार्रवाई करेंगे और पंचायत घर को रोजाना खोलने व रोस्टर के अनुसार सचिवों को बैठने के आदेश दिए जाएंगे, जो सही से कार्य नहीं करेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
संतोष कुमार सिंह, एडीएम