फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shamli News: नौकरी छोड़ बना रहे रागी से खाद्य पदार्थ, कमा रहे महीने के दो लाख

विज्ञापन
विज्ञापन
- ग्राम जलालपुर के रवि कुमार ने आयकर विभाग की छोड़ी नौकरी, 30 महिलाओं को भी दिया रोजगार
विज्ञापन

- सीडीओ कार्यालय में कृषि विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में प्रगतिशील किसानों ने लगाए अपने स्टॉल



फोटो समाचार



संवाद न्यूज एजेंसी

शामली। बचपन में मां जब रागी के आटे का हलवा बनाती थी, तो पूरे घर में उसकी खुशबू फैल जाती थी। हलवा, लड्डू हो या रोटी मां के हाथों बना रागी का हर स्वाद आज भी जुबान पर है। उसी पारंपरिक स्वाद को जलालपुर के रवि कुमार लोगों तक पहुंचा रहे हैं। उनके द्वारा बनाए गए स्वाद और इम्यूनिटी से भरपूर रागी के लड्डू, केक, नमकीन, बिस्किट आदि का सेवन कर लोग अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा रहे हैं। उन्होंने 30 अन्य महिलाओं को भी रोजगार दिया हुआ है।
जलालपुर के रहने वाले रवि कुमार ने बताया कि स्नातक हैं। दिल्ली में इनकम टैक्स विभाग में संविदा पर नौकरी करते थे। मगर कोरोना काल से पूर्व ही नौकरी को छोड़कर गांव में ही पिग फार्म खोल लिया था। कोरोना काल में फार्म को बंद करना पड़ा। जिस पर मैंने कृषि विभाग की मदद से भूमित्र जलालपुर फाॅर्मर प्रोड्यूसर कंपनी की स्थापना की। पिछले करीब छह माह से रागी की नमकीन, बिस्किट, लड्डू, आटा, केक आदि तैयार कर शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर आदि जिलों में बेचे जा रहे हैं। दो से तीन माह में 6 से लेकर 7 लाख रुपये तक कमा रहे हैं।
विज्ञापन




स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है रागी का लड्डू



रागी का लड्डू जितना स्वादिष्ट होता है उतना ही सेहतमंद भी है। इसमें प्रोटीन और खनिज काफी मात्रा में होता है। रवि ने बताया कि लड्डू और बिस्किट में जहां पोषण तत्व अधिक होते हैं। वहीं, प्रोटीन और फाइबर भी अधिक पाया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में भी अहम भूमिका निभाता है। बिस्किट शुगर फ्री भी रहता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।...हर दो से तीन माह में रवि कुमार 6 से लेकर 7 लाख रुपये तक कमा रहे हैं। अन्य लोगों को भी मोटे अनाज का सेवन करने के प्रति जागरूक किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा सीडीओ कार्यालय में प्रदर्शनी आयोजित की गई थी, जिसमें फाॅर्मर प्रोड्यूसर कंपनी के पदाधिकारियों और प्रगतिशील किसानों ने अपनी अपनी स्टॉल लगाई हुई थी। किसानों को भी जानकारी दी जा रही थी।
सीडीओ ने भी लिया प्रदर्शनी का जायजा



सीडीओ रंजीत सिंह, डीडीओ रजत यादव, कृषि विज्ञान केंद्र शामली के प्रभारी डाॅ. संदीप चौधरी, डाॅ. साकिब परवेज ने भी प्रदर्शनी का जायजा लिया। आर्गेनिक खेती से लेकर रागी के खाद्य पदार्थ तैयार करने वाले किसानों की सराहना की ।
विज्ञापन


आम की पूसा किस्में उगाकर प्रदेश स्तर पर जिले का नाम रोशन कर रहे चौधरी वेद और उनके बेटे डॉ. रोहित

सिंकदरपुर के रहने वाले चौधरी वेद पिछले करीब 35 सालों से अधिक समय से आम की आर्गेनिक तरीके से खेती कर प्रदेश स्तर पर जिले का नाम रोशन कर रहे हैं। प्रर्दशनी में उनके द्वारा रखी गई आम की किस्म श्रेष्ठा, आम्रपाली, अरुणिमा, मल्लिका भी छाईं रही। चौधरी वेद ने बताया कि आम की यह प्रजातियां लाल और पीले रंग की होती है। पेड़ छोटे होने के बावजूद अधिक फल आता है। इन प्रजातियों को अगस्त से लेकर सितंबर माह में उगाया जा सकता है। वेद और उनके बेटे डॉ. रोहित को जुलाई माह में ही आम की लालिमा प्रजाति उगाने पर प्रदेश में प्रथम स्थान दिया गया था। डॉ. रोहित को लखनऊ में इसे के लिए सम्मानित किया गया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें