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श्रद्घा, आस्था और विश्वास का प्रतीक है जाहरवीर गोगा म्हाडी

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संवाद न्यूज एजेंसी
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थानाभवन। नगर के दक्षिण में प्राचीन समय से स्थित जाहरवीर गोगा म्हाड़ी नगर के साथ-साथ क्षेत्र में भी श्रद्धा, आस्था और विश्वास की प्रतीक है। श्रावण मास की तृतीया को राजस्थान के हनुमानगढ़ स्थित सिद्धपीठ जाहरवीर गोगा म्हाड़ी के द्वार खुलने के साथ ही यहां श्रद्धालु भक्त निशान चढ़ाकर धार्मिक यात्रा जाहरवीर गोगा म्हाडी के लिए प्रस्थान करते हैं।
पांच दिवसीय इस धार्मिक यात्रा में श्रद्धालु पीले वस्त्र पहन कर पैदल या वाहन से हनुमानगढ़ जाते हैं। ये यमुना पूजन व सीमा पूजन करते हैं। गोरखनाथ गद्दी पर पहुंचने के बाद से पहले स्नान पूजन करने के तत्पश्चात म्हाड़ी पर निशान चढ़ाते हैं। निशान चढ़ाने के बाद श्रद्धालु थानाभवन आकर म्हाड़ी पर पूजन के बाद निशान चढ़ाते हैं। अपने घर परिवारों में कंदूरी का आयोजन करते हैं। मान्यता है 40 दिन तक जो परिवार गोगा म्हाड़ी के नाम का अपने घर में दीपक जलाते हैं। वे 41वें दिन उसे म्हाड़ी पर चढ़ाते हैं तो उनकी मन्नत अवश्य पूरी होती है।
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कथावाचक राज राजेश्वरानंद ने बताया कि नगर में यह म्हाड़ी करीब 200 साल पूर्व स्थापित हुई थी। इससे पूर्व यह म्हाड़ी अस्पताल कॉलोनी में थी। यहां प्राचीन समय से ही नगर पंचायत द्वारा मेला गुघाल का आयोजन किया जाता है। इसके प्रथम दिन क्षेत्रीय देवता धर्म सिंह का मेला अस्पताल कॉलोनी में एक दिन का लगता है। म्हाड़ी के महंत ब्रह्मनिष्ठ रामनरेश दास ने बताया कि प्राचीन समय से ही यह म्हाड़ी क्षेत्र में श्रद्धा और आस्था विश्वास की प्रतीक है। भादप्रद की त्रयोदशी को प्रथम पूजन के साथ ही नगर के साथ-साथ ग्रामीण अंचल के श्रद्धालु भक्त बड़ी संख्या में भाग लेते हैं। बैंड-बाजे ढोल-नगाड़ों के साथ म्हाड़ी पर निशान चढ़ाने आते हैं। श्रावण मास में यहां से सिद्धपीठ जाहरवीर गोगा म्हाड़ी राजस्थान जाने वाले श्रद्धालु के परिवार उनकी वापसी तक प्रतिदिन म्हाड़ी पर आते हैं।
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श्रद्धालुओं की वापसी पर अपने घर परिवारों के साथ म्हाड़ी पर भी कंदूरी भंडारे का आयोजन कर प्रसाद वितरित करते हैं। श्रावण मास के एक माह में म्हाड़ी पर विशेष उत्सव मनाया जाता है म्हाड़ी पर चढ़ने वाले प्रसाद व चढ़ावे पर उपाध्याय समाज का हक होता है। विगत कुछ वर्षों में नगर पंचायत द्वारा म्हाड़ी का सुंदरीकरण कराया था। समाज ने म्हाड़ी को तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने के लिए एक समिति का गठन किया है। वह संपूर्ण वर्ष म्हाड़ी के रखरखाव की व्यवस्था देखती है।
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