झिंझाना के बावरिया काॅलोनी में हुई चौपाल में मौजूद महिलाएं।
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शामली में घुमंतू आपराधिक जनजाति के नाम से जाने जाने वाले बावरिया समाज को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सकारात्मक पहल प्रारंभ हुई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत बावरिया जाति की महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों का गठन कराया जा रहा है, जिन्हें स्वरोजगार स्थापित करने के लिए तैयारी चल रही है। इसी सिलसिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक एनपी सिंह ने बृहस्पतिवार को बावरिया कॉलोनी में पहुंचकर चौपाल लगाई।
शामली जनपद में बावरिया जाति के 12 गांव हैं। आपराधिक वारदातों में खासकर चेन स्नेचिंग, चोरी और लूट के मामलों को लेकर बावरिया समाज बदनाम होता रहा है। बावरिया समाज से आपराधिक छवि हटाने और समाज को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक ने पहल शुरू कराई है। इसी के चलते बृहस्पतिवार को झिंझाना क्षेत्र में बावरिया कालोनी स्थित इंदिरा गांधी मेमोरियल इंटर कॉलेज में बावरिया समाज के लोगों के साथ चौपाल लगाई गई। उसमें राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक एनपी सिंह ने कहा कि बावरिया समाज के नवयुवकों को आपराधिक प्रवृति छोड़कर समाज की मुख्य धारा से जुड़ना होगा। खासकर परिवार की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए स्वयं सहायता समूह गठित करके स्वरोजगार स्थापित करने हैं। स्वरोजगार में अगरबत्ती, दोने-पत्तल बनाने, कपड़े सिलाई मशीन, दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन अथवा फूलों की खेती के जरिये अपना व्यवसाय प्रारंभ किया जा सकता है, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से किसी दूसरे पर निर्भर नहीं रहेंगी।
इस दौरान उन्होंने इंटरमीडिएट और हाईस्कूल में अच्छे अंक प्राप्त करने वाली बावरिया समाज की छात्राओं को सम्मानित भी किया। छात्रा समीक्षा ने इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा तथा नौकरी की कोचिंग के लिए आर्थिक तंगी बताई, तो निदेशक नागेंद्र प्रसाद सिंह ने उसे एक लाख रुपये आर्थिक सहायता दिलाने का भरोसा दिया। इसके अलावा अन्य छात्र छात्राओं को भी पढ़ाई में पूरी सहायता दिलाने की बात कही। इस दौरान राष्ट्रीय आजीविका मिशन के उपायुक्त शैलेंद्र व्यास, जिला विकास अधिकारी बलराम कुमार, उपजिलाधिकारी ऊन विनोद कुमार सिंह और जिला कार्यक्रम अधिकारी के अलावा बावरिया समाज से हरजीत सिंह, धीरध्वज, जीतराम आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
40 समूहों का हो चुका है गठन
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक
दलगंजन सिंह ने बताया कि बावरिया समाज के गांवों में 40 समूहों का गठन कर लिया गया है। समूहों को 15-15 हजार रुपये अनुदान राशि भी दे दी गई है, लेकिन अभी समूहों ने कोई उत्पाद बनाना शुरूनहीं किया है। प्रत्येक समूह में 10 से 15 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। विभाग का प्रयास है कि बावरिया समाज के 12 गांवों की कम से कम 12 हजार महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाए।
12 से 16 साल के लड़की-लड़कों का होगा सर्वे
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक एनपी सिंह ने बताया कि बावरिया समाज के उत्थान के लिए नई प्लानिंग की जा रही है, जिसमें 12 से 16 साल तक के लड़के-लड़की का सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद उनकी काउंसिलिंग कराई जाएगी, ताकि यह मालूम चले कि वह किस क्षेत्र में कार्य करना चाहते हैं। यदि कोई तकनीकी क्षेत्र में जाना चाहता है, तो उसे आईटीआई कराई जाएगी, यदि पुलिस अथवा सेना में भर्ती होना चाहता है, तो उसको उचित प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
सरकारी योजनाओं को दिलाया जाएगा लाभ
स्वयं सहायता समूहों का गठन करने वाली महिलाओं को स्वरोजगार स्थापना के साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ भी दिलाया जाएगा। आजीविका मिशन के निदेशक एनपी सिंह ने बताया कि पात्र महिलाओं को पेंशन दिलाई जाएगी, तो मनरेगा के तहत जॉब कार्ड बनाए जाएंगे और श्रम विभाग में पंजीकरण कराया जाएगा। ताकि श्रम विभाग की तरफ से योजना में सहायता मिल सके।