बाद में पता चला कि भारतीय कैदियों की पाकिस्तान की जेल में मिलाई नहीं की जाती है। यदि कोई मिलाई करने का प्रयास भी करता है तो उसके परिवार को उम्र भर के लिए ब्लैक लिस्टेड की सूची में डाल दिया जाता है।
ब्लैक लिस्टेड का मतलब यह होता है कि यदि भारतीय से मिलने का प्रयास करने वाले इस परिवार का पाकिस्तान का कोई सदस्य जेल में किसी आरोप में बंद होता है, तो उन्हें मिलने की मनाही होती है। जेल में बंद कैदी भी उन्हें बेवकूफ इंडियन कहकर चिढ़ाते थे। यही कारण था कि उनसे कोई मिलना पसंद नहीं करता था। जिसके कारण वह जेल में चुप रहते थे, किसी से बात नहीं करते थे।
अच्छे लोगों की भी कमी नहीं
नफीस और आमना ने बताया कि पाकिस्तान में कुछ अच्छे लोग भी हैं। एक ठाकुर नाम का शख्स उन्हें मिला, जिसने जेल से निकलवाने में भी मदद की और घर तक पहुंचाने का पूरा प्रयास किया। उसे वह लोग नहीं जानते थे। जेल में वह किसी से मिलने के लिए पहुंचा था। इसी दौरान उन्होंने ठाकुर को अपनी पीड़ा सुनाई थी। ठाकुर ने किसी तरह की टेंशन नहीं लेने की बात कहीं थी।
पाकिस्तान की जेलों में 50 से कैदी हैं भारतीय
सूत्रों के अनुसार, यूपी और अन्य स्थानों के 50 से अधिक लोग पाकिस्तान की कोटला, मुजफ्फराबाद और अन्य स्थानों की जेलों में बंद है। जो सामान अधिक लाने से लेकर अन्य आरोपों में सजा काट रहे हैं। कहा जाता है कि सजा पूरी होने के बाद भी भारत के लोगों को एक से लेकर डेढ़ साल अधिक समय तक जेलों में रखा जाता है।