अस्पतालों में बढ़े श्वांस, अस्थमा के मरीज, बरतें सावधानी
मौसम परिवर्तन, धूल भरी आंधी, गेहूं कटाई का सीजन होने से बनी समस्या
सरकारी व निजी अस्पतालों में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़े मरीज
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। मौसम में बार-बार बदलाव, धूल भरी आंधी चलने और गेहूं कटाई की वजह से सरकारी व निजी अस्पतालों में श्वास और अस्थमा के मरीजों की संख्या 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी है। चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह के मरीजों को ऐसे मौसम में सावधानी बरतने के साथ ही नियमित रूप से दवा लेनी चाहिए। इसमें लापरवाही भारी पड़ सकती है।
पिछले महीने अप्रैल से जिले का मौसम स्थिर न होकर बार-बार बदल रहा है। कभी मौसम गर्म ताे कभी ठंडा हो रहा है। कभी बारिश होती है तो कभी तेज धूप निकलती है। बीच-बीच में तेज हवा और आंधी चलने से धूल के गुब्बार उड़ते रहे हैं। इस तरह का मौसम लोगों की सेहत पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। इस मौसम में वायरल बुखा, नजला, जुकाम व खांसी के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। इसके साथ ही श्वास और अस्थमा के रोगी भी 15 से 20 प्रतिशत बढ़ गए हैं। सीएचसी में लगभग 550-600 मरीज रोज आ रहे हैं। इनमें पहले सांस और अस्थमा के 50-55 मरीज आ रहे थे। अब इनकी संख्या बढ़कर 70-75 तक हो गई है।
सीएचसी के चिकित्सक डॉ. बिजेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले 15 दिन से श्वास और अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ी है। इसकी वजह मौसम में बार-बार बदलाव, धूल भरी आंधी और हाल ही में हुई गेहूं की कटाई की वजह से सांस और अस्थमा के मरीजों की समस्या बढ़ जाती है। इस तरह के मरीजों को सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
फिजिशियन डॉ. पंकज गर्ग का कहना है कि जब गेहूं कटाई का सीजन होता है तो उसका भूसे के संपर्क में आने से श्वास और एलर्जी के मरीज बढ़ते हैं। इसके अलावा मौसम में परिवर्तन के दौरान ज्यादा ठंडा पानी पीने से यह समस्या बनती है। इसलिए ऐसे मौसम में मरीजों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। जो दवा पहले से चल रही है, उसे बंद न करें। समस्या होने पर चिकित्सक की सलाह से नियमित रूप से दवा लेते रहें। कोई भी दवा बिना चिकित्सक की सलाह से न ले। उनका कहना है कि मौसम के स्थिर होने पर इस तरह के मरीजों को राहत मिलेगी।
लक्षण:
-लगातार खांसी होना
- सांस लेने में परेशानी होना
- सीने में जकड़न होना
- बलगम के साथ खून आना
- खराश सूजन के साथ गले में दर्द होना
- आवाज में बदलाव होना
- शरीर में दर्द व थकान होना
बचाव:
- धूम्रपान व तंबाकू का सेवन न करें
- धूल वाले स्थानों पर जाने से बचे
- वायु प्रदूषण से बचाव के लिए फेस मास्क लगाएं
- जरूरत के अनुसार भाप ले
- नियमित रूप से सांस की दवा लेते रहे
- कोई भी समस्या होने पर चिकित्सक की सलाह ले