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Shamli News: संघर्ष की जिंदगी में आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया

Wed, 01 May 2024 04:42 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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शामली/जलालाबाद। आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपया ये हाल है श्रमिक वर्ग का। जिस गति से महंगाई बढ़ी उसके हिसाब से मजदूरी में वृद्धि नहीं हो पाई। हालात ये है कि घर का खर्चा तक पूरा नहीं हो पा रहा और मजदूर वर्ग कर्ज के बोझ में दबता जा रहा है।
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सरकारी मनरेगा की बात करें तो यहां पंजीकृत मजदूर को एक दिन की दिहाड़ी 337 रुपये मिलती है। प्राइवेट काम में भी मजदूरी 400 से 500 रुपये के बीच में है। इसमें भी महीने में कई दिन काम भी नहीं मिल पाता है। इस हिसाब से मजदूर वर्ग वर्तमान की मजदूरी में अपना घर का खर्चा तक नहीं चला पा रहा है। उसके दैनिक खर्चे तक पूरे नहीं हो पा रहे है। बच्चों को अच्छी शिक्षा और परिवार को उनकी इच्छाओं को पूरा करना उसके लिए सपने जैसा हो गया है।
अब कहने को तो सरकार ने लेबर कोर्ट की व्यवस्था दी है। लेकिन यह व्यवस्था भी छोटे मजदूरों को न्याय दिलाने में नाकाफी साबित हो रही है। जिस कारण हर तरफ मजदूरों को शोषण भी हो रहा है। मजदूर सुरेश कुमार का कहना है कि दस साल पहले ढाई से तीन सौ रुपये मजदूरी होती थी जो आज बढ़कर सिर्फ चार से पांच सौ रुपया हो पाई जबकि महंगाई इससे कई गुना बढ़ गई है।
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समस्याओं से जूझ रहे, कहां जाए

मजदूरों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। पहले तो हमारी दिहाड़ी कम है और वह भी जब समय से ना मिले तो परिवार का पालन कैसे होगा। अब जाए तो कहा जाए। -लवलेश कुमार



मजदूरी और महंगाई की तुलना करें तो मजदूरी कछुआ चाल चल रही है और महंगाई खरगोश की चाल। ऐसे में हम लोगों के लिए बहुत मुश्किल हो रही है। -राजेश कुमार



जब दिन रात मेहनत करने के बाद भी परिवार पालना मुश्किल हो जाए तो क्या करें। सरकार को मजदूर वर्ग की ओर खास ध्यान देना चाहिए। तभी मजदूरों का भला होगा। -विनय कुमार



यहां तो मजदूरी पड़ नहीं रही है। सोच रहा हूं कि दूसरे प्रदेश में जाकर काम करूँ। फिर सोचता हूं कि बाहर रहने में उससे ज्यादा खर्च हो जाएगा। अब तो बस सरकार से ही उम्मीद है। -विनोद कुमार
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