शामली में जिन आवासों को रेलवे ने अपने कर्मचारियों को रहने के लिए दिया, कर्मचारियों ने उन आवासों को अपनी कमाई का जरिया बना लिया। आवासों में खुद नहीं रहते हैं, बल्कि किराये पर देकर कमाई की जा रही है। मामले की शिकायत होने पर रेलवे अधिकारियों की टीम ने शामली रेलवे स्टेशन परिसर में आवासों की जांच की, तो पोल खुलकर सामने आ गई। इस दौरान एक दर्जन से ज्यादा आवासों में प्राइवेट लोग किराये पर रहने की बात सामने आई।
शामली रेलवे कालोनी में 200 से ज्यादा रेलवे अधिकारियों और कर्मचारियों के आवास हैं। शामली निवासी ज्ञानेंद्र मलिक ने नार्दन रेलवे के उच्चाधिकारियों को शिकायत भेजकर कहा कि रेलवे के आवासों को किराये पर दिया जा रहा है। इस पर दिल्ली मंडल रेलवे के उच्चाधिकारियों ने संयुक्त टीम गठित करके रेलवे कालोनी में आवासों की जांच कराने का निर्देश दिया। शुक्रवार दोपहर सहारनपुर से सीनियर सेक्शन इंजीनियर (सिग्नल) राजेश कुमार, सीनियर सेक्शन इंजीनियर (वर्क्स) पीके सिंह, उत्तर रेलवे के यातायात निरीक्षक पवन कुमार, सेक्शन इंजीनियर अतुल जिंदल और आरपीएफ के उपनिरीक्षक रेलवे कालोनी में आवासों की जांच करने पहुंचे। पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर दो बजे तक आवासों की जांच हुई। सेक्शन इंजीनियर पीके सिंह ने बताया कि आवासों में 10 से 12 प्राइवेट लोगों के किराये पर दिए जाने की शिकायत की गई थी। जिनमें चार पांच किराएदार रेलवे का आवास खाली करके अपना सामान लेकर चले गए है। शुक्रवार को हुई रेलवे आवासों की जांच रिपोर्ट तैयार करके दिल्ली मंडल के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई है।
किराये पर रहने वालों में मची भगदड़
रेलवे की संयुक्त टीम शुक्रवार दोपहर जब रेलवे कालोनी में आवासों की जांच करने पहुंची, तो कर्मचारियों के आवासों में किराये पर रहने वालों में भगदड़ मच गई। कई लोग इसी दौरान आवासों से अपना सामान समेटकर ट्रक में लादकर फरार हो गए। इसके चलते कई आवासों पर ताले लटके हुए मिले।
कई साल से चल रहा यह खेल
शामली की रेलवे कालोनी के आवासों को किराये पर देने का खेल कई साल से चल रहा है। मालूम चला है कि कुछ कर्मचारियों ने अपने नाम आवास आवंटित होने के बावजूद उनमें रहना शुरू नहीं किया, क्योंकि वह शामली के आसपास के ही किसी गांव में रहते हैं। वहीं से अपनी ड्यूटी पर आते जाते हैं। वहीं, कुछ आवास ऐसे भी हैं, जो स्थानां
तरित हो चुके कर्मचारियों ने अपने कब्जे में लिए हुए हैं। उन कर्मचारियों का दूसरे रेलवे स्टेशनों पर स्थानांतरण हो गया, लेकिन यहां उनके परिवार सरकारी आवासों में ही रहते हैं।