शामली। बरसात के मौसम में यमुना खादर के गांवों में बाढ़ की स्थिति बनने पर बीमारियों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी कर ली है। स्वास्थ्य विभाग ने लगभग 21 गांवों को चिह्नित कर कैराना और ऊन तहसील क्षेत्र में तीन-तीन बाढ़ चौकी बनाई है। बाढ़ चौकियों पर चिकित्सक व स्टाफ की नियुक्ति के साथ पर्याप्त मात्रा में दवाएं उपलब्ध रहेंगी।
अगले महीने जुलाई से बरसात का मौसम शुरू हो रहा है। बरसात के मौसम में यमुना में जल स्तर बढ़ने से उसके किनारे के गांवों में बाढ़ की आशंका रहती है। यमुना खादर इलाके में बीमारियों की रोकथाम के लिए छह बाढ़ चौकी बनाई है। स्वास्थ्य विभाग ने यमुना किनारे कैराना और ऊन तहसील क्षेत्र के लगभग 21 गांवों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शामिल किया गया है। बरसात में अगर इन गांवों में बाढ़ की स्थिति बनती है तो इन गांवों में उपचार के लिए बनाई गई बाढ़ चौकी पर चिकित्सक व स्टाफ तैनात रहेता। बाढ़ चौकी पर पर्याप्त मात्रा में दवाएं, ब्लीचिंग पाउडर, क्लोरीन की टेबलेट और एंबुलेंस की व्यवस्था रहेगी। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि कैराना क्षेत्र में इस्सोपुर खुरगान, रामड़ा और डुंडूखेड़ा में बाढ़ चौकी बनाई गई है। ऊन तहसील क्षेत्र में ऊदपुर, भड़ी भरतपुर व मंसूरा में बाढ़ चौकी रहेगी। भड़ी भरतपुर बाढ़ चौकी क्षेत्र के गांव भड़ी भरतपुर, भड़ी कोरियान, पुरानी भड़ी, मुस्तफाबाद, साल्हापुर, सकौती, ,नाई नंगला गांवों की निगरानी करेगी। ऊदपुर की बाढ़ चौकी गांव ऊदपुर, मंगलौरा, शीतलगढ़ी, बिडौली व ख्वाजपुर में और मंसूरा की बाढ़ चौकी मंसूरा, डोकपुरा, बल्हेड़ा, चौतरा, ओदरी व फतेहपुर गांवों की निगरानी करेगी। उन्होंने बताया सभी बाढ़ चौकी बनाकर उन पर चिकित्सक व स्टाफ की ड्यूटी तय कर दी गई है।
बाढ़ आने पर इन बीमारियों की आशंका
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि बरसात में अगर यमुना किनारे के गांव में बाढ़ जैसी स्थिति बनती है तो वहां पर त्वचा संबंधी रोग खाज खुजली, बुखार व मच्छर जनित बीमारियां होने की संभावना रहती है। पानी को शुद्ध करने के लिए क्लोरीन की गोली वितरित की जाएगी।