शामली, ऊन। क्षेत्र में राजकीय डिग्री कॉलेज न होने से छात्र-छात्राओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्राइवेट डिग्री कॉलेज का खर्च वहन न कर पाने के कारण उन्हें घर से दूर उच्च शिक्षा के लिए जाना पड़ता है। आर्थिक कमजोरी की वजह से भी प्रतिवर्ष काफी छात्र-छात्राएं वंचित रह जाते हैं।
कई वर्ष से राजकीय डिग्री काॅलेज की स्थापना की मांग चली आ रही है, जो आज तक पूरी नहीं हो सकी है। ऊन कस्बे व आसपास ग्राम पंचायत बझेड़ी, गागौर, भमेड़ी, भोगीमाजरा, टोड़ा, चौसाना, खोड़समा, पिंडौरा, हथछौया, सांपला, ढिंडाली, नौनांगली, खेड़ाभाऊ, सिंभालका आदि में कुल आबादी एक लाख से अधिक है। इस आबादी पर यहां एक भी राजकीय डिग्री काॅलेज नहीं है। यहां के छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए शामली या अन्य जिलों का रुख करना पड़ता है।
शामली हाईवे पर दो प्राइवेट डिग्री कॉलेज हैं। इन कॉलेजों में उच्च शिक्षा हासिल करना गरीब छात्रों के बजट से बाहर है। इसके लिए छात्रों को शामली, कैराना में स्थित राजकीय डिग्री काॅलेज में उच्च शिक्षा के लिए आवेदन करना पड़ता है।
कई वर्ष से ऊन में राजकीय डिग्री कॉलेज की स्थापना की मांग की जा रही है। कैराना लोकसभा क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद प्रदीप चौधरी के समक्ष भी ऊन के निवासियों ने राजकीय डिग्री कॉलेज बनवाने की मांग की है, लेकिन मांग पूरी नहीं हो सकी। हालांकि, ऊन में प्रदेश के पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा ने राजकीय डिग्री काॅलेज स्वीकृत कराया है। लेकिन आज तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई।
इनका कहना है
- राजकीय डिग्री कॉलेज बनवाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। यहां पर राजकीय डिग्री कॉलेज बनने से गरीब छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा। - हरविंद्र सिंह, प्रधानाचार्य डीएवी कॉलेज।
- क्षेत्र में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राजकीय डिग्री काॅलेज का निर्माण जरूरी है। कस्बे में राजकीय डिग्री कॉलेज होने पर छात्रों के सामने आर्थिक समस्या नहीं होगी। -शांतनु मित्तल, प्रबंधक डीएवी कॉलेज।
- जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर है, उनके लिए प्राइवेट कॉलेज में शिक्षा लेना मुश्किल है। निर्धन छात्र-छात्राओं का राजकीय कॉलेज निर्माण से भला होगा। -नरेश गोयल, समाजसेवी।
- राजकीय डिग्री कॉलेज बनने से ऊन व आसपास ग्रामीण छात्र-छात्राओं को लाभ होगा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। -ब्रजेश वशिष्ठ, पूर्व प्रधानाचार्य।