थानाभवन। सिद्धपीठ शिव मंदिर कचोरीनाथ में आयोजित सत्संग में महंत सतीश नाथ ने कहा कि परमात्मा जिसको भी और जब भी मिले, संसार में अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते ही मिले। जो संसार में रहकर भी अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वाह करना जानता है, वो परमात्मा के प्रेम का पात्र भी बन जाता है। संसार से दूर भागकर कभी भी परमात्मा को नहीं पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्रकृति में परमात्मा नहीं, अपितु ये प्रकृति ही परमात्मा है। जगत और जगदीश अलग-अलग नहीं, एक ही तत्व हैं। परमात्मा का जो हिस्सा दृश्य हो गया, वह जगत है और जगत का जो हिस्सा अदृश्य रह गया, वहीं जगदीश है। शास्त्रों का मत है कि केवल मूर्ति में नहीं अपितु कण-कण में भगवद दर्शन करने वाला ही वास्तविक भक्त है। प्रत्येक वस्तु परमात्मा की है, अपनी मानते ही वह अशुद्ध हो जाती है। हम सब भी परमात्मा के ही अंश हैं। परमात्मा से अलग अपना अस्तित्व स्वीकार करते ही हम भी अशुद्ध हो जाते हैं। अपने आपको परमात्मा का समझकर सदैव श्रेष्ठ मार्ग की ओर अग्रसर बने रहो। सत्संग में भगवान गर्ग, विनोद सैनी, राकेश गोयल, आशुतोष मंगल, गोपाल सैनी, देवेंद्र सिंघल, राजेश कुमार मौजूद रहे।