- विश्व क्षय रोग दिवस : जिले में 1270 सक्रिय क्षय रोगियों का चल रहा उपचार
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। क्षय रोग लाइलाज नहीं है। अगर समय पर जांच और उपचार कराएं तो इस रोग से छुटकारा पाया जा सकता है। सरकारी अस्पतालों में क्षय रोग की जांच और उपचार की निशुल्क सुविधा उपलब्ध है। जिले में इस समय 1270 सक्रिय क्षय रोगी हैं, जिनका उपचार चल रहा है।
हर साल 24 मार्च को विश्व क्षय रोग दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को इस रोग के प्रति जागरूक करना है। जिले की स्थिति देखें तो यहां हर साल क्षय रोगी मिल रहे हैं। 2021 में शासन से स्वास्थ्य विभाग को तीन हजार क्षय रोगी खोजने का लक्ष्य मिला था, जिसमें 2802 क्षय रोगी मिले थे। 2022 में 3100 के लक्ष्य के मुकाबले 3234 मरीज मिले। इस साल 2023 में जनवरी से अब तक 420 क्षय रोगी मिल चुके हैं। पिछले साल 2022 के 650 और इस साल के 620 कुल 1270 क्षय रोगी वर्तमान में सक्रिय हैं, जिनका उपचार चल रहा है। इनमें 71 एमडीआर श्रेणी के क्षय रोगी शामिल हैं।
सीएमओ डॉ. संजय अग्रवाल ने बताया कि समय पर जांच और उपचार कराने से क्षय रोगी ठीक हो जाता है। क्षय रोग के लक्षण मिलने पर रोगी को जांच करानी चाहिए। सरकारी अस्पतालों में क्षय रोगी की जांच और उपचार निशुल्क दिया जाता है। साथ ही निक्षय पोषण योजना के तहत 500 रुपये प्रति माह मरीज के खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजे जाते हैं। उन्होंने बताया कि 2022 में प्रधानमंत्री क्षय रोग मुक्त भारत अभियान के तहत 640 क्षय रोगियों को विभिन्न संस्थाओं और अधिकारियों ने गोद लिया था, जिनमें 480 रोगी पूरी तरह ठीक हो चुके हैं। 2023 में अब तक 180 रोगियों को गोद लिया जा चुका है।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि क्षय रोग को लेकर लोगों में पहले के मुकाबले काफी जागरूकता आई है, लेकिन अभी भी लोगों को और जागरूक होने की जरूरत है। क्षय रोग पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए जागरूकता और जनसहयोग जरूरी है। उनका कहना है कि अगर आस पड़ोस में क्षय रोग के लक्षण वाला कोई व्यक्ति मिलता है तो उसे नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाए। क्योंकि एक क्षय रोगी 20 लोगों को संक्रमित कर सकता है।
क्षय रोग के लक्षण :
- दो सप्ताह से अधिक खांसी होना।
- खांसी के साथ बलगम या खून आना।
- रात में सोते समय पसीना आना।
- भूख न लगना, लगातार वजन कम होना।
- शाम को बुखार होना, सीने में दर्द होना।
बचाव
क्षय रोगी के पास मास्क लगाकर जाए।
लक्षण नजर आने पर समय पर जांच व उपचार कराएं।
क्षय रोगी के बिस्तर, तौलिया व रूमाल आदि का इस्तेमाल न करें।
किसी के खांसने पर अपने मुंह पर रूमाल या कपड़ा रखें।
- कैल्शियम व विटामिन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
निक्षय पोषण योजना के लिए बजट का इंतजार
जिले में सक्रिय रोगियों को निक्षय पोषण योजना के लिए बजट का इंतजार करना पड़ रहा है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि शासन से बजट न आने के कारण रोगियों की 920 किस्त रुकी हुई है। उन्होंने बताया फरवरी में शासन को 39.30 लाख रुपये गे बजट की मांग भेजी गई थी, जिसमें 10.45 लाख रुपये की धनराशि मिल पाई थी। इस महीने 28 लाख रुपये के बजट की मांग भेजी गई है। बजट मिलते ही मरीजों को निक्षय पोषण योजना की धनराशि उपलब्ध करा दी जाएगी। उधर, जिला अस्पताल में चेस्ट फिजीशियन न होने से एमडीआर केंद्र क्षय रोगी को भर्ती नहीं किया जाता। एमडीआर के रोगियों को सहारनपुर या मेरठ रेफर किया जाता है।