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Shamli News: पहले कोरोना की मार, अब फीस माफ नहीं होने से मिली निराशा

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-सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अभिभावकों में निराशा, कहा कि न्यायालय करे फिर से विचार
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-स्कूल संचालकों ने निर्णय को सही बताया, बोले पहले ही कर चुके हैं 50 प्रतिशत फीस माफ फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। पहले तो कोरोना ने अभिभावकों की जेब पर बोझ डाला और अब फीस माफ नहीं होने से निराशा मिली है। अभिभावकों ने न्यायालय से फीस माफी के लिए फिर से विचार करने की अपील की है। स्कूल संचालकों ने निर्णय को सही बताया और कहा कि वह पहले भी 30 से 50 प्रतिशत फीस को माफ कर चुके हैं।
वर्ष 2020 में कोरोना की बीमारी फैली थी, जिसके बाद स्कूल बंद हो गए थे। छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई। कोरोना का असर आम आदमी की जेब पर पड़ा था। कई अभिभावक अपने बच्चों की ऑनलाइन क्लास तक नहीं करा पाए थे। स्कूल संचालकों ने छात्र-छात्राओं की फीस माफ नहीं की थी। इसके बाद अभिभावकों ने कोर्ट का सहारा लिया था और हाईकोर्ट ने 15 फीसदी फीस माफ करने के आदेश दिए थे, लेकिन अभी तक फीस माफ नहीं हुई। अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रद कर दिया।। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अभिभावकों को निराशा हाथ लगी है। इस मुद्दे पर कुछ अभिभावकों और स्कूल संचालकों से बातचीत...
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनको फीस माफ को लेकर कुछ आस जगी थी, उनका बेटा देव गोयल कक्षा 12 में पढ़ता है। मगर अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जो फीस माफ की आस थी, वह पूरी नहीं हो सकेगी। इसलिए सुप्रीम कोर्ट को एक बार फिर निर्णय पर विचार करना चाहिए।
-विनोद गोयल
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कोरोना बीमारी ने एक तो पहले ही उनकी जेब पर बोझ डाल दिया था। वह मेहनत मजदूरी से परिवार का पालन पोषण करते हैं। स्कूल संचालकों ने हाईकोर्ट के आदेश पर भी फीस माफ नहीं की थी। इतने में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आ गया। -राजेंद्र शर्मा
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बेटी कक्षा 11 की छात्रा है और प्राइवेट स्कूल में पढ़ती है। कोरोना के समय स्कूल संचालक से फीस माफ करने की मांग की थी, लेकिन फीस माफ नहीं की गई। बेटी का नाम स्कूल से काटने की चेतावनी दी गई थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को अभिभावकों के हित में फैसला लेना चाहिए। -सुनील कुमार
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स्कूल संचालकों को 25 फीसदी फीस माफ करनी चाहिए, क्योंकि जब स्कूल बंद रहे तो अभिभावकों से भी फीस नहीं लेनी चाहिए थी। हाईकोर्ट का आदेश सही था। सर्वाेच्च न्यायालय को एक बार फिर इस पर विचार करना चाहिए। -मीनू गोयल



रॉक गोल्ड एकेडमी संचालक शिखर गोयल ने कहा कि वह पहले ही छात्रों की 50 फीसदी तक फीस माफ कर चुके हैं। हाईकोर्ट ने 15 फीसदी फीस माफ करने का आदेश जो दिया था उसका भी स्वागत था। अब सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया है, उसका भी स्वागत है। यह आदेश उनके लिए है जिन्होंने छात्रों की फीस माफ नहीं की थी। वह इस श्रेणी में नहीं आते हैं।
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स्कोटिश स्कूल प्रधानाचार्या आशु त्यागी ने बताया कि हम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हैं। कोरोना के समय छात्रों के परिजनों को काफी परेशानी हुई थी और इसको देखते हुए उनकी फीस भी माफ की गई थी। न्यायालय का जो भी आदेश आएगा, उसका पूरी तरह से पालन किया जाएगा।
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