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Shamli News: ऑटो एजेंसीज और बीमा कंपनी पर दो लाख रुपये का जुर्माना

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शामली। ऑटो एजेंसी द्वारा बाइक का बिल व बीमा बैंक के नाम बनाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एजेंसी और बीमा कंपनी पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही परिवादी को दुर्घटनाग्रस्त बाइक की बीमा धनराशि 50378 रुपये अदा करने, क्षतिपूर्ति के 50 हजार रुपये व वाद व्यय के 10 हजार रुपये अदा करने का आदेश सुनाया।
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गांव सिंभालका निवासी शेखर ने 14 सितंबर 2016 को जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग शामली में दायर कराए परिवाद में बताया था कि उनके पिता रविंद्र वर्मा ने बाइक खरीदने के लिए पंजाब नेशनल बैंक शाखा खेड़ीकरमू के यहां वाहन ऋण के लिए आवेदन किया था। बैंक ने 55125 रुपये का ऋण स्वीकृत कर आशा ऑटो एजेंसीज करनाल रोड शामली के नाम जारी कर दिया। एजेंसी से 18 दिसंबर 2013 को बाइक खरीदी। एजेंसी के माध्यम से बाइक का बीमा आईसीआईसीआई लोम्बार्ड इंश्योरेंस कंपनी मुंबई के प्राधिकृत व्यक्ति से कराया था। जब उनके पिता ने घर जाकर बिल और बीमा पॉलिसी देखी तो पता चला कि बिल व बीमा पंजाब नेशनल बैंक के नाम बना दिया। उनके पिता ने एजेंसी पर संपर्क किया तो उन्होंने इस गलती को जल्द ही ठीक कराने का आश्वासन दिया। 27 दिसंबर 2013 को उनके पिता की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई और बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गई। परिवादी का कहना है कि उसने बीमा कंपनी से क्लेम के लिए संपर्क किया। बैंक ने 23 जनवरी 2014 को उनके पिता के खाते से बाइक की ऋण राशि उनके पिता के खाते से वसूल कर ली। बीमा कंपनी ने पॉलिसी में बीमाधारक का नाम पंजाब नेशनल बैंक दर्ज होने के कारण क्लेम न मिलने की बात कही। साथ ही कहा कि अगर वे ऑटो एजेंसी से बाइक के बिल व बीमा पॉलिसी को सही करा लें, तभी उन्हें क्लेम मिल सकता है। उसने ऑटो एजेंसी से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि उनकी बीमा कंपनी से बात हो गई है और यह लिपिकीय त्रुटि है। वे अपने सभी कागज बीमा कंपनी को भेज दें, क्लेम मिल जाएगा, लेकिन उन्हें क्लेम का कोई भुगतान नहीं मिला। आयोग के अध्यक्ष हेमंत कुमार गुप्ता, सदस्य अमरजीत कौर व अभिनव अग्रवाल ने आशा ऑटो एजेंसीज, बीमा कंपनी के विरुद्ध परिवाद स्वीकार कर लिया, जबकि बैंक के विरुद्ध निरस्त कर दिया। आयोग ने आदेश सुनाया कि दुर्घटनाग्रस्त बीमित बाइक की बीमा धनराशि 50378 रुपये मय नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज दुर्घटना के तीन माह बाद की तिथि से अंतिम अदायगी और परिवादी के पिता रविंद्र वर्मा के मृत्यु के दावे की नियमानुसार देय धनराशि मय नौ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज दुर्घटना के तीन माह बाद की तिथि से अंतिम अदायगी तक परिवार को अदा करें। ऑटो एजेंसी और बीमा कंपनी परिवादी को हुई शारीरिक, मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के लिए 50 हजार रुपये व परिवाद व्यय दस हजार रुपये परिवादी को भुगतान किए जाने के लिए आयोग में जमा करें। इसके अलावा अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए उनको संयुक्त रूप से दो लाख रुपये अर्थ दंड से दंडित किया गया। अर्थदंड की धनराशि परिवादी को देय न होकर नियमानुसार राजकोष में जमा की जाएगी। आयोग में यह समस्त धनराशि 45 दिन के अंदर जमा करनी होगी।
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