शामली। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसान आंदोलन के समर्थन, विभिन्न मांगों को लेकर भाकियू पदाधिकारी, कार्यकर्ता और किसानों ने जिला मुख्यालय पर ट्रैक्टर मार्च निकाला। बाद में ट्रैक्टरों के साथ कलक्ट्रेट में पहुंचे वहां प्रदर्शन कर धरना दिया। साथ ही कलक्ट्रेट के बाहरी गेट पर आधा घंटे तक तालाबंदी भी की गई। हालांकि पुलिस ने किसानों को समझाने का प्रयास किया, मगर वह नहीं माने। किसान नेताओं ने एमएसपी पर कानून की मांग की। वहीं मांगों के पूरा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष कालिंदर मलिक, गठवाला खाप के थांबेदार चौधरी श्याम सिंह, भारतीय किसान यूनियर की महिला विंग की जिलाध्यक्ष कविता चौधरी के नेतृत्व में किसान और कार्यकर्ता कलक्ट्रेट के सामने एकत्र हुए। वहां से जुलूस निकालते हुए खूब नारेबाजी की। इस दौरान किसानों ने ट्रैक्टरों को कलक्ट्रेट के अंदर ले जाने का प्रयास किया, मगर पुलिसकर्मियों ने घुसने नहीं दिया। बाद में किसान ट्रैक्टरों को लेकर कलक्ट्रेट के अंदर घुस गए और धरना देकर बैठ गए।
भाकियू जिलाध्यक्ष कालिंदर मलिक और बाबा चौधरी श्याम सिंह ने एमएसपी पर कानून, बकाया गन्ना भुगतान, किसानों पर कर्ज माफी की मांग की। साथ ही कहा सरकार किसानों के साथ वादाखिलाफी कर रही है। किसान अपना हक लेकर रहेगा, अगर जरूरत पड़ी तो किसान भारी संख्या में दिल्ली भी जाएंगे। जिलाध्यक्ष कालिंदर मलिक ने कहा कि सरकार लगातार किसानों की अनदेखी कर रही है। बॉर्डर पर किसानों को परेशान किया जा रहा है। किसानों का दुख देखकर आक्रोश है। सभी किसानों के साथ हैं। जब राष्ट्रीय नेतृत्व का आह्वान होगा, तभी दिल्ली को कूच कर देंगे। किसानों ने करीब 3 घंटे तक कलक्ट्रेट में धरना दिया और सरकार के खिलाफ भी खूब नारेबाजी की। ऋषिपाल सिंह ने कहा कि सरकार किसान विरोधी है। यदि जल्द ही किसानों की मांगों को पूरा नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। चौधरी श्याम सिंह ने कहा कि सरकार ने एमएसपी की मांग को पूरा नहीं किया है। इसके अलावा गन्ने का बकाया भुगतान भी नहीं किया जा रहा है। हाईकमान का आदेश मिलते ही पहले हरियाणा बार्डर, इसके बाद दिल्ली कूच किया जाएगा। अंत में किसानों ने राष्ट्रपति के नाम एडीएम संतोष कुमार को ज्ञापन सौंपा।
ये हैं भाकियू की प्रमुख मांगे...
- मूल्य वृद्धि पर नियंत्रण रखें, भोजन, दवाओं, कृषि और मशीनरी जैसी आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी हटाएं, पेट्रोलियम उत्पादों और रसोई गैस पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कमी करें।
-खाद्य सुरक्षा की गारंटी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सरल बनाएं।
-सार्वजनिक क्षेत्रों में उद्यमी सरकारी विभागों का निजीकरण बंद करें और राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइप लाइन को खत्म करें।
- बिजली संसोधन विधेयक 2022 को वापस लें। कोई प्री पेड स्मार्ट मीटर नहीं।
- काम के अधिकार को मौलिक बनाया जाए। स्वीकृत पदों को भरें और बेरोजगारों के लिए रोजगार के अवसर पर पैदा करें।
- किसानों को बीज, उर्वरक और बिजली पर सब्सिडी बढ़ाएं। किसानों की उपज के लिए एमएसपी की कानून गारंटी दें।
- सभी कृषक परिवारों को कर्ज के जाल से मुक्त करने के लिए व्यापक ऋण माफी योजना की घोषणा करें।
-एनपीएस खत्म करें। ओपीएस को बहाल करें और सभी सामाजिक सुरक्षा प्रदान करें।
धरना देने वालों में यह रहे मौजूद
भाकियू जिलाध्यक्ष कालिंदर मलिक, गठवाला खाप के थांबेदार चौधरी श्याम सिंह, ईश्वर सिंह फौजी, वीरेंद्र सिंह, सचिन राणा, भाकियू महिला जिलाध्यक्ष कविता चौधरी, जिला उपाध्यक्ष कमलेश पंवार, सूरज चौधरी, अमजद खान, समरपाल सिंह तोमर, जितेंद्र सिंह, दीपक राणा, रविंद्र राणा, योगेंद्र पंवार, कमलेश पंवार, अमरदीप आदि मौजूद रहे।
-रास्ता रोकने के कारण वाहन चालक रहे परेशान
भाकियू ने सुबह 11 बजे तहसील के सामने ट्रैक्टर मार्च का कार्यक्रम प्रस्तावित किया था। इसके कारण सुरक्षा की दृष्टि से सुबह ही तहसील के आसपास पुलिस तैनात कर दी गई। वहीं तहसील को जाने वाले मार्ग पर बेरिकेडिंग लगा दी, जिसके कारण वाहन चालकों को पुल के ऊपर से करीब 700 मीटर घूमकर तहसील के अंदर जाने को मजबूर होना पड़ा। कुछ वाहन चालक बैरिकेडिंग के पास से ही निकलने के लिए पुलिस से नोकझोंक करते हुए भी नजर आए। दोपहर बाद कलक्ट्रेट के बाहरी गेट पर ताला लगाने के दौरान भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
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हम आपके अपने हैं, जाने दो भाई
मार्च के बाद कुछ किसानों ने कलक्ट्रेट के अंदर ट्रैक्टरों को ले जाने का प्रयास किया तो कुछ किसान नेताओं ने कहा कि हम आपके अपने हैं, जाने दो भाई। इसके बाद पुलिस ने ट्रैक्टर चालकों को अंदर जाने दिया। कोतवाली पुलिस के अलावा आदर्श मंडी, बाबरी, कांधला पुलिस भी तैनात रही।
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यह बोले किसान नेता...
भाकियू महिला विंग की जिलाध्यक्ष कविता चौधरी का कहना है कि बार-बार मांग के बावजूद सरकार किसानों की मांग को पूरा नहीं कर रही है। किसानों को बार्डर पर रोका गया है। एमएसएपी पर कानून समेत विभिन्न मांगों को जल्द ही पूरा नहीं किया गया तो किसान बड़ा आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
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भाकियू के मंडल महासचिव और पूर्व प्रमुख अब्बास ने कहा कि एमएसपी पर कानून जल्द लागू होना चाहिए। कहा कि कुछ विजिलेंस के कर्मचारी छापामारी के नाम पर किसानों से रुपये वसूलते हैं, ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। जल्द किसानों की मांगें सरकार को मान लेनी चाहिएं।
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भाकियू नेता मा. मोहर सिंह ने कहा कि सरकार जान बूझकर किसानों की अनदेखी कर रही है। यदि किसानों की मांगों को पूरा नहीं किया गया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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किसान नेता ईश्वर सिंह ने कहा कि बार्डर पर फंसे किसानों को सरकार को दिल्ली जाने देना चाहिए। यदि उन्हें जल्द नहीं जाने दिया गया तो जिले के किसान भी हरियाणा और उसके बाद दिल्ली कूच करेंगे।