शामली/बाबरी। किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों व भाकियू कार्यकर्ताओं शनिवार को दिल्ली-देहरादून इकॉनोमिक कॉरिडोर की निर्माण कंपनी के प्लांट पर अधिकारियों का घेराव किया। समस्याओं के निस्तारण को लेकर उनकी अधिकारियों से तीखी नोंकझोंक हुई। किसानों ने समस्या का समाधान न होने पर निर्माण कार्य चालू न होने की चेतावनी दी।
गठवाला खाप के थांबेदार बाबा श्याम सिंह मलिक के साथ समिति के पदाधिकारियों व किसानों ने हाईवे निर्माण कंपनी के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उनकी अंडरपास की ऊंचाई व नालियों की मांगों पर निर्माण कंपनी के कर्मचारी ईमानदारी से काम नहीं कर रहे है। किसानों को गुमराह करते हुए आपस में भिड़ाकर माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। भारतीय किसान यूनियन जिलाध्यक्ष कालेंदर मलिक ने कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए भारतीय किसान यूनियन पूरी तरह से किसान संघर्ष समिति के साथ खड़ी है और किसानों के साथ कोई भी भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा।
बाबा श्याम सिंह ने कहा कि जो पुल और नालियां चेंज ऑफ स्कोप से छूट गए हैं उनकी मांग दोबारा से एनएचएआई को भेजी जाए। बाबा श्याम सिंह थांबेदार व निर्माण कंपनी अधिकारी सोनू सांगवान के बीच किसानों के शोषण को लेकर तीखी नोंकझोंक हुई। भाकियू जिलाध्यक्ष ने किसी तरह उन्हें शांत किया। किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष ठाकुर वीर सिंह ने निर्माण कंपनी के अधिकारियों को चेताया कि जब तक किसानों के लिए सर्विस रोड का समाधान नहीं होता है। तब तक सड़क के दोनों और दीवार का निर्माण नहीं होने दिया जाएगा। कंपनी के अधिकारी सोनू सांगवान, दीपक राणा, धर्मेंद्र राणा व अन्य अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया। जिस पर किसान शांत हुए। इस दौरान योगेंद्र प्रधान, जयबीर सिंह मुखिया, बिजेंद्र, डॉ. तेजपाल, दिनेश कुमार, प्रमोद जागलान, रवि मलिक आदि किसान उपस्थित रहे।
भाकियू जिलाध्यक्ष व किसान की हुई बहस
प्लांट पर किसानों व कंपनी के अधिकारियों के वार्ता के दौरान भाकियू जिलाध्यक्ष कालेंद्र मलिक, खानपुर निवासी किसान इसपाल सिंह की किसी बात पर कहासुनी शुरू हो गई। मामला बढ़ता हुदेख बाबा श्याम सिंह थांबेदार व अन्य किसानों ने दोनों को समझाते हुए किसान इसपाल सिंह को बाहर बैठाया। तब जाकर मामला शांत कराया।
किसान ने लगाया मिट्टी के पैसे न देने का आरोप
वार्ता के दौरान चूनसा निवासी किसान कालूराम ने निर्माण कंपनी के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने उसकी छह बीघा भूमि की मिट्टी 25 हजार रुपये बीघा खरीदी थी। मिट्टी उठाने के बाद 94 हजार रुपये दिए हैं, बाकी बकाया भुगतान अभी तक नहीं किया है। जिसके लिए कई बार कहने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है।