शामली, गढ़ीपुख्ता। क्षेत्र के गांव पुरमाफी में ग्राम प्रधान पति आदेश कुमार की अध्यक्षता में उनके आवास पर एक गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें कृषि विभाग के अधिकारी एडीओ अजय तोमर ने कहा कि पराली जलाने की घटनाओं पर सेटेलाइट व अन्य प्रकार से नजर रखी जाएगी।
ग्राम प्रधान से भी गांव के सभी किसानों को जागरूक करने और पराली को नष्ट कराने के लिए पूसा डिकंपोजर का प्रयोग कर जैविक खाद के रूप में प्रयोग करने की बात कही। फसल अवशेषों को न जलाकर उसका प्रबंधन करने के लिए पशुओं के चारे के रूप में प्रयोग, मिट्टी में मिला कर खाद बनाने के लिए किया जा सकता है। कृषि विभाग के रोहित खोखर ने बताया कि हम बायो डिकंपोजर विधि से निस्तारण के लिए एक प्लास्टिक के ड्रम में 200 लीटर पानी लें। इसमें 2 किलो गुड़ मिलाकर अच्छी तरह मिला लें। बायो डिकंपोजर बोतल खोलकर सभी सामग्री को इस घोल में मिला दें।
ध्यान रहे कि बायो डिकंपोजर को बोतल में उपलब्ध दवाई को हाथ से ने छुए। दवा मिलाने के बाद हाथों को अच्छी तरह से साबुन से धो लें। इस घोल को सुबह शाम लकड़ी की सहायता से हिलाएं। ड्रम या टंकी को ढककर रख दें। 7 दिन के अंदर छिड़काव के लिए कल्चर तैयार हो जाएगा। इस कल्चर को स्प्रे से ही खेत में पड़ी पराली पर छिड़काव करें। 15 दिन बाद पराली व गन्ने की पत्ती गलनी शुरू हो जाएगी। 21 से 25 दिन में खाद बनने की स्थिति में आ जाएगी। इस अवसर पर हरेंद्र कुमार, महेंद्र सिंह, भूपेंद्र, रामदेव, ओमबीर, सोहन वीर,विक्रम ,सचिन आदि किसान मौजूद रहे।