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Shamli News: सेना के हवलदार रूपेंद्र तोमर को नम आंखों से दी विदाई

Mon, 22 Jul 2024 03:59 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
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झिंझाना  राष्ट्रीय शिक्षा सदन इंटर कॉलेज के मैदान में पहुंचा शहीद का पा​​र्थिव  शरीर
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झिंझाना (शामली)। श्रीनगर के स्वर्ण कोट में शहीद हुए सेना में हवलदार रूपेंद्र तोमर का पार्थिव शरीर रविवार की सुबह कस्बे के राष्ट्रीय शिक्षा सदन इंटर काॅलेज के मैदान में पहुंचा। जहां शहीद को श्रद्धांजलि देने के बाद अंतिम यात्रा निकाली गई। पैतृक गांव में शहीद सैनिक के शव का सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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रूपेंद्र तोमर का पार्थिव शरीर कस्बे में पहुंचने पर सभी की आंखें नम हो गई। अंतिम यात्रा कस्बे से होते हुए पैतृक गांव बीबीपुर जलालाबाद पहुंची। यात्रा में डीजे पर देशभक्ति गीत के साथ जब तक सूरज चांद रहेगा रुपेंद्र तोमर तेरा नाम रहेगा के नारे गूंजते रहे। शहीद को सैन्य सम्मान एवं गार्ड ऑफ ऑनर के साथ सलामी देते हुए अंतिम विदाई दी गई। शहीद को मुखाग्नि उनके 13 वर्षीय पुत्र हिमांशु ने दी। इस दौरान सभी की आंखें नम हो गई।

गांव बीबीपुर जलालाबाद निवासी रुपेंद्र तोमर श्रीनगर के स्वर्ण कोट में शुक्रवार की दोपहर को शहीद हो गए थे। रूपेंद्र तोमर 2004 में 18 जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। श्रीनगर से पार्थिव शरीर के साथ आए सूबेदार संदीप कुमार ने बताया कि वह अपने बटालियन के साथियों के साथ सियाचिन की तंग पहाड़ियों के रास्ते गश्त पर जा रहे थे कि अचानक रास्ते में उनकी तबीयत खराब हो गई। बटालियन के साथियों ने इमरजेंसी तौर पर उनको दवाई मंगाकर खिलाई। दवाई देने के कुछ देर बाद उनकी तबीयत सही हो गई, लेकिन थोड़ी देर बाद ही फिर से अचानक तबीयत बिगड़ गई जिन्हें अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।
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अंतिम यात्रा में कैराना उप जिला अधिकारी स्वप्निल यादव व तहसीलदार, सीओ कैराना अमरदीप मौर्य, विधायक चौधरी नाहिद हसन, मनीष चौहान आदि शामिल हुए। क्षेत्र के लोगों का परिजनों को ढांढस बंधाने के लिए तांता लगा हुआ है। वह अपने पीछे पत्नी गुड्डी पुत्र हिमांशु 13 वर्ष तथा देव 10 वर्ष को रोता बिलखता छोड़ गए है।

बचपन से होनहार थे रुपेंद्र
रुपेंद्र तोमर बचपन से ही होनहार थे। उनका देश की सेवा करने का ही उद्देश्य था। रुपेंद्र ने इंटर तक की पढ़ाई झिंझाना से और बीए बड़ौत बागपत से की, लेकिन बीए में पढ़ने के दौरान ही वह 18 जाट रेजीमेंट में भर्ती हो गए थे। इसके बाद 2006 में शामली जनपद में मखमूलपुर निवासी निशा उर्फ गुड्डी से विवाह हुआ। इसके बाद दो पुत्र हिमांशु और देव हुए।
मार्च में रुपेंद्र छुट्टी पर आए थे और करनाल में प्लॉट लेकर मकान बना रहे थे। 29 अप्रैल को रुपेंद्र तोमर ड्यूटी पर गए। वह इस बार छुट्टी पर आने के बाद बच्चों को करनाल में ही शिफ्ट करने की बात कह रहे थे।
पत्नी ने चरण स्पर्श कर दी अंतिम विदाई
रुपेंद्र तोमर को उनकी पत्नी गुड्डी ने चरणस्पर्श कर फूल माला अर्पित कर अंतिम विदाई दी। एक तरफ पति के खोने का गम तो दूसरी तरफ देश पर अपनी जान न्यौछावर करने का गर्व था। शहीद की मां सावित्री देवी ने कहा कि मेरा लख्ते जिगर आज अपने परिवार का सिर ऊंचा कर गया। वहीं शौकिंद्र ने भी भाई के शहीद होने पर नम आंखों से विदाई दी और देश की सेवा के लिए परिवार से आगे भी जवान देने की बात कही।

झिंझाना  राष्ट्रीय शिक्षा सदन इंटर कॉलेज के मैदान में पहुंचा शहीद का पार्थिव  शरीर

झिंझाना  राष्ट्रीय शिक्षा सदन इंटर कॉलेज के मैदान में पहुंचा शहीद का पार्थिव  शरीर

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