शामली। व्हाट्सएप, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम आदि पर नकली नोट, हथियारों की होम डिलीवरी करने वाले गिरोह के संबंध में पुलिस और क्राइम ब्रांच को अहम जानकारी हाथ लगी है। गिरोह को तमिलनाडु से ऑपरेट किया जा रहा है। तमिलनाडु में बैठे लोग सोशल मीडिया के माध्यम से वेस्ट यूपी, हरियाणा, दिल्ली के लोगों को चंगुल में फंसाकर बिक्री का दावा कर रहे हैं। पुलिस ने सात मोबाइल नंबरों को चिह्नित किया है । जल्द ही गिरोह का भांडाफोड होगा। उधर, गिरोह के सदस्य अभी भी सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म पर नकली नोटों की बोली लगा रहे हैं।
अमर उजाला ने सात अगस्त के अंक में सोशल मीडिया के जरिए हो रही नकली नोटों की होम डिलीवरी और इसके बाद 14 अगस्त को नकली नोटों के बाद अब हथियारों की होम डिलीवरी नामक शीर्षक से प्रमुखता के साथ खबरें प्रकाशित की थी। मामले में संज्ञान लेते हुए एसपी अभिषेक ने जांच पुलिस और क्राइम ब्रांच की दो टीमों को सौंपी थी। एसपी अभिषेक ने बताया कि जांच में सामने आया है कि जिन नंबरों से लोगों से बात की जा रही हैए वह तमिलनाडु में चल रहे हैं, जिनमें कुछ नंबरों को हरियाणा के मेवात और कुछ को दिल्ली के लोगाें की आईडी पर निकलवाया गया है। गिरोह के सदस्य व्हाट्सएप का ही प्रयोग करते हैं, एक नंबर पर दो-दो व्हाट्सएप चलाए जा रहे हैं, ताकि पुलिस ट्रेस नहीं कर सके। कहा कि जल्द ही गिरोह का भांडाफोड किया जाएगा। इस मामले में तमिलनाडु पुलिस का भी सहयोग लिया जाएगा।
अभी भी नकली नोटों के लिए लोगों को फंसा रहे
जांच में सामने सामने आया है कि गिरोह ने अब टेलीग्राम पर नए तीन और नए ग्रुप बना लिए हैं, जिनमें तमिल फेक इंडियन करेंसी, फेक करेंसी आदि शामिल है। जिसमें प्रतिदिन वीडियो डालकर लोगों को 10 से 20 हजार में 50 से लेकर 60 हजार तक के नकली नोट देने का दावा किया जा रहा है। गिरोह के सदस्य नकली नोटों को भी वीडियो कॉल कर दिखा रहे हैं।
ठग भी हो सकते हैं
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया के जरिए नकली नोट और हथियारों की सप्लाई करने वाले गिरोह के सदस्य ठगी करने वाले गिरोह के सदस्य भी हो सकते हैं। ऐसे लोगों के बहकावे में न आएं।
जिनकी आईडी पर चलाए जा रहे सिम, उनके बारे में लगी अहम जानकारी हाथ
पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य जिन नंबरों का प्रयोग कर रहे हैं, वह दिल्ली और अन्य स्थानों के रहने वाले लोगों के हैं। जांच में पता चला है कि गिरोह के सदस्यों ने किसी अन्य के माध्यम से दूसरों की आईडी पर सिम निकलवाए हुए हैं। गिरोह में काफी संख्या में सदस्यों के शामिल होने की उम्मीद है। उधर, खुफिया विभाग भी मामले की जांच में जुटा हुआ है। माना जा रहा है कि मजदूरों को रुपयों का झांसा देकर उनकी आईडी पर इन सिमों को निकलवाकर नकली नोट और हथियारों की सप्लाई का दावा किया जा रहा है।