- रालोद के प्रतिनिधि मंडल ने लिया यमुना का जायजा, आज किसानों को साथ लेकर सीएम के नाम सौंपेंगे ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
चौसाना। यमुना किनारे स्थित लक्ष्मीपुरा गांव में ठोकर बहने के पांचवें दिन भी सिंचाई विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कोई समाधान नहीं कर सके। दिनभर कर्मचारी बही ठोकर को जोड़ने में जुटे रहे। उधर, रालोद के जनप्रतिनिधि और नेता लक्ष्मीपुरा पहुंचे तथा आसपास के ग्रामीणों की समस्याएं सुनी। ग्रामीणों ने रो-रोकर प्रतिनिधिमंडल के सामने अपना दर्द बयां किया।
चौसाना के गांव लक्ष्मीपूरा में ठोकर टूटने के बाद से लगातार बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। हजारों बीघा से अधिक कृषि भूमि पर खड़ी फसल यमुना के बहाव के बह गई। रविवार को रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के निर्देश पर रालोद नेता व शामली से विधायक प्रसन्न चौधरी,थानाभवन विधायक अशरफ अली खान,पूर्व विधायक राव वारिस, पूर्व विधायक नवाजिश अली आदि चौसाना यमुना नदी स्थित लक्ष्मीपूरा पहुंचे और ड्रेनेज के अधिकारियों से बातचीत करते हुए वर्तमान परिस्थितियों के साथ ही चले रहे राहत एवं बचाव कार्यों के बारे में जानकारी हासिल की। वहीं, मौके पर मौजूद लोगों ने नेताओं को अव्यवस्थित हालात से अवगत कराया। नेताओं ने ग्रामीणों की पीड़ा को जानकर विधानसभा में मुद्दे को उठाने एवं राहत बचाव कार्याें में तेजी लाने के साथ मुआवजा दिलाने के लिए जिला प्रशासन से वार्ता करने का भरोसा दिया।
अधिकारियों पर भड़के ग्रामीण
राहत व बचाव कार्यों में लगे ड्रेनेज विभाग के अधिकारियों व ग्रामीणों के बीच ठोकर को ठीक नहीं किए जाने को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। जिसके बाद स्ट्रक्चर तैयार कर रहे मजदूरों ने काम को रोक दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि स्ट्रक्चर का दिखावा किया जा रहा है। समय रहते एहतियातन कार्य क्यों नहीं किये गए। वहीं जेई विकास कुमार ने बताया कि ग्राम प्रधान कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। स्ट्रक्चर को तैयार करने व उसमें डाले जाने वाले मेटेरियल पर आपत्ति है। राहत एवं बचाव का कार्य कुशल कारीगरों से ही कराया जा रहा है।
महिला ने रो-रोकर दर्द किया बयां
सहारनपुर के कुंडा की रहने वाली जिंदी लक्ष्मीपुरा क्षेत्र में खेती करती है। विधायक के सामने रोते हुए महिला ने बताया कि पिछले साल भी उसकी दस बीघा फसल बह गई थी। इस बार भी उसकी 12 बीघा गन्ने और धान की फसल बह गई है। यदि पहले से ही अधिकारी ठोकर की मरम्मत कराते तो किसानों की फसल को बचाया जा सकता था।
जेई ने विधायक के सामने रोया दुखड़ा
जेई विकास कुमार ने रालोद विधायकों के सामने शासन की मंशा पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि शामली को बाढ़ प्रभावित जिले में नही माना जाता है। स्ट्रक्चर को नियमित रूप से ठीक कराने के लिए सालाना पैसा भी नही मिल पा रहा है। कई किलोमीटर के लिए केवल पांच लाख ही मिले थे। अपनी जेब से राहत व बचाव के काम करने पड़ रहे हैं।
आज डीएम को सौंपेंगे ज्ञापन
रालोद नेता और जनप्रतिनिधि किसानों की समस्या को लेकर सोमवार को डीएम से मिलेंगे। ठोकर को ठीक कराने से लेकर किसानों की मदद की मांग की जाएगी। इसके बाद भी समाधान नहीं होने पर विस में भी मामले को जोर शोर से उठाया जाएगा।
सिंचाई विभाग के प्रयास नाकाफी
विधायक प्रसन्न चौधरी ने कहा कि उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के साथ यमुना का दौरा किया। देखने में आया है कि किसानों की कई सौ बीघा फसल में नुकसान हुआ है। कई ट्यूबवेल भी बर्बाद हो गई है। सिंचाई विभाग के प्रयास नाकाफी है। यदि पहले से ही ठोकर की मरम्मत कराई जाती तो शायद यह नौबत नहीं आती। सोमवार को डीएम से मिलेंगे। इसके बाद विस में भी मामले को उठाया जाएगा।
प्रशासन को करने होंगे व्यापक इंतजाम
थाना भवन विधायक असरफ अली ने बताया कि ठोकर विभागीय अधिकारियोंं की लापरवाही के कारण बही है। ग्रामीणों को अभी भी बाढ़ का खतरा सता रहा है। किसानों को बर्बाद हुई फसल का जल्द से जल्द मुआवजा मिलना चाहिए। किसानों से सुझाव भी मांगे गए हैं, जिन्हें डीएम को सौंपा जाएगा।
कई गांव में मंडरा रहा बाढ़ का खतरा, यमुना का जलस्तर बढ़ा तो हो सकती है परेशानी
पूर्व विधायक राव वारिस ने कहा कि दौरा करने के बाद देखने में आया है कि ठोकर को सही करने का अभी को ठोस प्रयास नहीं किया गया है। कई सालों से बाढ़ नियंत्रण के लिए जिले को रुपया नहीं मिला है। लक्ष्मीपुरा समेत आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। यदि अधिक बारिश हुई या फिर यमुना में पानी छोड़ा गया तो यमुना किनारे के कुछ गांव प्रभावित हो सकते हैं।