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Shamli News: ड्रेनेज विभाग की हीलाहवाली से टूटा तटबंध, चूहों ने भी निभाई विलेन की भूमिका

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कैराना में रौद्र रूप में बहती यमुना नदी
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अमर उजाला पड़ताल..
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: लोगों का आरोप- तटबंध का निरीक्षण करना तक मुनासिब नहीं समझते विभागीय अधिकारी
: 8 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तटबंध काे जोड़ा जा सका, वरना कई गांवों में होते बाढ़ जैसे हालात
: डीएम खुद मौके पर रहे मौजूद
महबूब अली
शामली। सहपत में तटबंध टूटने के बाद सैकड़ों किसानों की जहां फसलें जलमग्न हो गई। वहीं कैराना के एक परिवार के तीन सदस्यों को किसी तरह रेस्क्यू किया गया। इसके अलावा शामली में टूटे तटबंध के कारण हरियाणा के पानीपत में भी कई लोग बह गए थे, जिन्हें किसी तरह लोगों ने निकाला। पानीपत के सनोली की गोशाला में तीन गोवंशों की भी बात कहीं जा रही है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर तटबंध टूटा ही क्यों? पड़ताल के दौरान लोगों ने बताया कि ड्रेनेज विभाग ने समय पर क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत नहीं कराई। यही नहीं, तटबंध के पास खेतों में चूहों ने भी विलेन की भूमिका निभाई। तटबंध के पास चूहों द्वारा खेतों से होते हुए बिल बनाए हुए थे, जो बारिश में और भी अधिक बड़े हो गए और तटबंध टूट गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभागीय अधिकारी गंभीर होते तो पहले से ही बने बिलों और तटबंध की मरम्मत कराकर बाढ़ को रोका जा सकता है। मगर ऐसा नहीं किया गया। डीएम रविंद्र सिंह का कहना है कि वे मौके पर गए थे। कई घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद तटबंध को जोड़ा गया। टूटने के अन्य कारणों की भी जांच कराई जा रही है। जिले में कोई भी जनहानि नहीं हुई है। किसानों की फसलें जरूर जलमग्न हुई है। कहा कि किसानों से बातचीत में चूहों के कारण बनाए गए बिलों से भी तटबंध के टूटने की बात सामने आई है।
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चूहों ने तटबंध में छेद कर बनाए बडे़ बिल



गांव सहपत निवासी किसान सतीश कुमार ने बताया कि गांव सहपत के पास जिस जगह से तटबंध टूटा है। वहां पर चूहों ने छेद कर बड़े बिल बना रखे थे। बरसात के पानी में चूहों द्वारा बनाए गये बिल और अधिक बडे़ हो गये थे। जिस कारण यमुना के पानी ने चूहे के द्वारा किए गए बड़े छेदों से रास्ता बनाकर तटबंध को तोड़ दिया हैं।
...तो कई गांवों में होते बाढ़ के हालात
तटबंध टूटने के बाद डीएम रविंद्र सिंह, एडीएम संतोष कुमार और सरकारी अमला तुरंत ही मौके पर पहुंच गया था। खुद डीएम दो घंटे से अधिक समय तक यमुना के आसपास ही रहे तथा मातहतों को दिशा निर्देश दिए। यदि तटबंध को नहीं जोड़ा जाता को आसपास के अन्य गांव भी प्रभावित हो सकते थे।

हर साल बरसात से पहले कराई जाती है तटबंध की मरम्मत
हर साल बरसात आने से पहले ड्रेनेज विभाग द्वारा जगह-जगह क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत कराई जाती हैं और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्लास्टिक के कट्टो में मिट्टी व रेत भरकर रखा जाता है। इसके अलावा पत्थर भी पर्याप्त मात्रा में रखे जाते हैं। लेकिन इस बार तटबंध पर कहीं पर भी न तो मिट्टी के कट्टे भर कर रखे गए और ना ही अन्य तैयारियां समय रहते पूरी की गई। किसान सजाउद्दीन, सोहनवीर, दीपक ने बताया कि ड्रेनेज विभाग के अधिकारी कभी कभार तटबंध की मरम्मत कराने आते हैं, लेकिन कहीं-कहीं थोड़ी मिट्टी डालकर केवल फोटो खिंचवा कर वापस चले जाते हैं।

खुरगान, नगलाराई, हैदरपुर में भी क्षतिग्रस्त मिला तटबंध
यमुना नदी के किनारे बरसात के दिनों में यमुना के पानी को रोकने के लिए ड्रेनेज विभाग की ओर से बाकायदा लंबा चौड़ा तटबंध बना रखा है, लेकिन तटबंध की मजबूती की पोल उस समय खुल गई। जब यमुना ने उफान पर आकर अपना रौद्र रूप दिखाया, क्योंकि आसपास के किसानों का कहना हैं कि पिछले कई सालों से न तो तटबंध की मरम्मत कराई गई हैं और ना ही यहां पर पत्थरों की ठोकर लगवाने का काम ड्रेनेज विभाग द्वारा किया गया हैं।
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गांव सहपत के पास तटबंध टूटने के बाद करीब 40 मीटर लंबा गैप बन गया। इससे पहले गांव खुरगान, नगलाराई व हैदरपुर के पास भी जगह-जगह तटबंध में कटान की सूचना मिली। जिसके बाद तहसीलदार गौरव सांगवान ने लेखपाल व ड्रेनेज विभाग की टीमों को मौके पर भेजा। जहां पर ड्रेनेज विभाग ने आनन-फानन में क्षतिग्रस्त तटबंध पर मिट्टी डालकर अपनी नाकामी छिपाने का काम किया। तीनों गांवों के किसानों ने बताया कि यमुना नदी का पानी से क्षतिग्रस्त तटबंध में कटाव शुरू हो गया था। अगर समय रहते ध्यान ना दिया जाता तो यहां से भी तटबंध टूट कर उनकी फसलों व गांव में पानी घुस सकता था।
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